हॉकिन्स की इंग्लैण्ड वापसी (विन – ४)

पिछले भाग में मैंने आपको बताया था कि हॉकिन्स के कई अनुरोधों और कोशिशों के बाद बादशाह जहाँगीर ने एक फ़रमान जारी करके अंग्रेज़ों को भारत में व्यापार करने की अनुमति दे दी। इससे उत्साहित होकर हॉकिन्स ने तुरन्त सूरत सन्देश भिजवाया और अपने साथी विलियम फिंच को आगरा बुलवा लिया। लेकिन उधर आगरा के मुग़ल दरबार में फिर कुछ ऐसा हुआ, जिसके कारण बादशाह ने अंग्रेज़ों को दिया फ़रमान रद्द कर दिया। आखिर ऐसा क्या हुआ था? इस पर आज बात करेंगे। पिछले भागों को पढ़कर आप जान ही गए होंगे कि अंग्रेज़ों के आने के बहुत पहले से आगे पढ़ें …

जहाँगीर के दरबार में विलियम हॉकिन्स का प्रवेश (विन -३)

(इसे पढ़ने से पहले कृपया यहाँ क्लिक करके पिछला लेख पढ़ लें।) मुग़ल बादशाह के आदेश पर विलियम हॉकिन्स आगरा में बादशाह के दरबार में पहुँचा। यहाँ उसे पता चला कि अकबर की मौत हो चुकी है और अब उसका बेटा जहाँगीर यहाँ का शासक है। जब से हॉकिन्स भारत पहुँचा, तभी से वह पुर्तगालियों के कहर से परेशान था। पुर्तगाली सन १४९८ से ही भारत के साथ व्यापार कर रहे थे। जब तक हॉकिन्स के रूप में अंग्रेज़ यहाँ पहुँचे, तब तक पुर्तगालियों को भारत आए हुए सौ साल से भी ज़्यादा समय हो चुका था। यहाँ के शासकों में आगे पढ़ें …

भारत में कंपनी का आगमन (विन – २)

(इसे पढ़ने से पहले कृपया यहाँ क्लिक करके पिछला लेख पढ़ लें।) इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता से लगभग डेढ़ सौ किमी की दूरी पर स्थित बांतेन आज एक छोटा-सा सुस्त शहर है। लेकिन ४०० साल पहले यह एक प्रसिद्ध और व्यस्त बंदरगाह था। अरब, तुर्क, ईरानी, भारतीय, चीनी और अन्य कई देशों के व्यापारी यहां के बाज़ार में अपने देशों से रेशम, चीनी मिट्टी के बर्तन, मसाले, कालीन और अन्य सामान लेकर आते थे। बदले में वे यहाँ से मिर्च और अन्य मसाले खरीदकर ले जाते थे। दिसंबर १६०० में ईस्ट इंडिया कंपनी को ब्रिटेन की रानी ने एशिया में आगे पढ़ें …

ईस्ट इण्डिया कंपनी की स्थापना (विन -१)

स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि ‘धर्म भारत की आत्मा है’। यह बात तब जितनी सही थी, आज भी उतनी ही सही है। भारत के इतिहास में धर्म के नाम पर या धर्म की रक्षा के लिए जितने युद्ध हुए हैं, उतने शायद किसी और बात के लिए नहीं हुए होंगे। १० मई १८५७ को मेरठ की छावनी में जो हुआ, उसका भी एक कारण धार्मिक ही था। लेकिन उस पर चर्चा करने से पहले मैं आपको थोड़ा और पीछे ले जाना चाहता हूँ। १९ मई १५८८ को स्पेन के लड़ाकू जहाज़ों का विशाल बेड़ा लिस्बन से निकला। इस बेड़े आगे पढ़ें …

घुसपैठ…

बांग्लादेश का निर्माण: सन १९४७ में भारत का अंतिम विभाजन हुआ और पाकिस्तान बना। आगे १९७१ में हुए युद्ध के बाद पाकिस्तान के भी दो टुकड़े हुए और बांग्लादेश का निर्माण हुआ। इस बारे में मैंने विस्तार से एक लेख लिखा था, जो आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं। १९७१ के युद्ध और बांग्लादेश के निर्माण का मुख्य कारण यह था कि बांग्लादेश के लोगों को यह महसूस होता था कि पाकिस्तान सरकार भाषा, प्रशासन, राजस्व, प्रतिनिधित्व आदि सभी मामलों में बांग्लादेश के साथ भेदभाव करती है। इसे लेकर लगातार आंदोलन चलते रहते थे और उनके दमन के लिए सेना आगे पढ़ें …

तकनीक का दुरुपयोग?

महाराष्ट्र में जालना जिले के एक गाँव में एक गरीब दलित परिवार में जन्मे दिलीप म्हस्के ने अपनी प्राथमिक शिक्षा गाँव के ही स्कूल से पूरी की। उसके आगे की पढ़ाई नवोदय विद्यालय में करने के लिए केन्द्र सरकार से छात्रवृत्ति मिली। बारहवीं तक की पढ़ाई वहीं से पूरी हुई। जालना जिले में अकाल की परिस्थिति के कारण परिवार मुंबई चला आया। म्हस्के महोदय ने वहीं से कानून की डिग्री हासिल की। गरीबी के कारण मजदूरी भी करनी पड़ी। आगे उन्होंने मुंबई आईआईटी से प्लानिंग एंड डेवलपमेंट के विषय में कोई डिग्री ली। उसी दौरान वे सामाजिक और राजनैतिक कार्यों आगे पढ़ें …

कॉमनवेल्थ: गुलामी की निशानी

सोलहवीं शताब्दी से ब्रिटेन ने दुनिया भर के देशों पर कब्जा करना और उन्हें गुलाम बनाना शुरू किया। इन देशों को ब्रिटिश कॉलोनियां या उपनिवेश कहा गया। इन देशों का शासन पूरी तरह ब्रिटिश सरकार के अधीन था। भारत भी इनमें से एक था। उन्नीसवीं शताब्दी में इन देशों को स्वतंत्रता या स्वायत्तता मिलना शुरू हुई। सन १८६७ में कनाडा को डोमिनियन का दर्जा मिला। इसका मतलब ये था कि अब कनाडा का शासन ब्रिटिश सरकार नहीं, बल्कि कनाडा के लोग ही चलाएंगे। लेकिन, कनाडा पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हुआ था। डोमिनियन होने का मतलब था कि अभी भी ब्रिटेन आगे पढ़ें …

चीन का नया महाद्वीप

पिछले हफ़्ते मैंने “China’s Second Continent” (चीन का दूसरा महाद्वीप) नामक पुस्तक पढ़ी। इसके लेखक एक अमरीकी पत्रकार हॉवर्ड फ़्रेंच हैं। पुस्तक अफ्रीका में चीन द्वारा किए जा रहे निवेश और वहाँ बड़ी संख्या में रहने जा रहे चीनी नागरिकों के बारे में है। पूरे अफ्रीका महाद्वीप के कई देशों में चीन अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है। चीन की मदद से इन देशों में कई सरकारी इमारतें, पुल, स्टेडियम, परिवहन और कृषि व्यवस्था में सुधार आदि कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इन परियोजनाओं में काम करने के लिए लाखों की संख्या में चीनी नागरिक इन अफ्रीकी आगे पढ़ें …

तेल के खेल में डूबता वेनेजुएला

कुछ दिनों पहले मैंने मालदीव और उसके बाद दक्षिण अफ्रीका की घटनाओं के बारे में दो लेख लिखे थे। मालदीव का संकट अभी सुलझा नहीं है, लेकिन दक्षिण अफ्रीका में राष्ट्रपति जैकब जुमा को उनकी पार्टी ने पद से हटाकर उपराष्ट्रपति सैम्युअल रैम्फोसा को नया राष्ट्रपति चुन लिया है, इसलिए वहां का मामला फिलहाल ठंडा पड़ चुका है। लेकिन दूर दक्षिण अमरीका के एक देश वेनेजुएला में भी पिछले कई महीनों से भीषण उथल-पुथल जारी है। आज के लेख में मैं उसी बारे में लिख रहा हूं। ५ मार्च २०१३ को ५८ वर्ष की आयु में वेनेजुएला के राष्ट्रपति ह्यूगो आगे पढ़ें …

अफ़्रीका में हलचल

कल अपने लेख में मैंने मालदीव के राजनैतिक संकट की बात की थी। आज दक्षिण अफ्रीका की बात करने वाला हूं। इन दिनों वहां भी राजनैतिक हलचल जारी है। लेकिन वहां तक पहुंचने से पहले हमें उत्तर प्रदेश जाना पड़ेगा क्योंकि द.अफ्रीका के कई लोगों की राय है कि उनके देश की वर्तमान सरकार के भ्रष्टाचार के पीछे उप्र के एक परिवार का बड़ा हाथ है। तो आइए आज कुछ नई कड़ियाँ जोड़ने का प्रयास करें। सन १९९३ तक दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद बहुत बड़े पैमाने पर था। कई मामलों में यह केवल सामाजिक ही नहीं था, बल्कि कई मामलों आगे पढ़ें …