नया चुनावी अनुभव…

वर्तमान लोकतांत्रिक प्रणाली में चुनाव यदि युद्ध है, तो मतदान केन्द्र युद्धभूमि और वोटिंग मशीन हथियार है. कल 17 अप्रैल को मैंने भी पूरा दिन इसी युद्धभूमि में बिताया और एक निर्वाचन बूथ पर अपनी पार्टी के मित्रों के साथ मतदाताओं का सहयोग किया. पिछले कई वर्षों से मैं मप्र भाजपा की आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया पर फेसबुक व ट्विटर के ज़रिए ऑनलाइन गतिविधियों में सहयोग करता रहा हूँ, लेकिन आज पहली बार पूरा एक दिन ‘ग्राउंड-वर्क’ के लिए दिया.

ऑनलाइन कार्य और ज़मीनी कार्य में क्या अंतर है, मतदाताओं का विश्वास जीतने के लिए क्या-क्या करना और क्या-क्या न करना आवश्यक है, एक छोटे-से चुनावी बूथ का प्रबंधन करते समय भी कितनी सारी छोटी-बड़ी बातों और नियमों का ध्यान रखना आवश्यक होता है आदि बहुत-कुछ आज मुझे देखने-सीखने को मिला. आज का दिन निश्चित रूप से मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण, उपयोगी और यादगार था. सबसे ज़्यादा संतुष्टि इस विचार से मिली कि मैंने ‘नमोमय भारत’ के लक्ष्य की पूर्ति के प्रयास में योगदान दिया.

 

(चित्र श्री चंद्रभूषण जोशी द्वारा)

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