मीडिया का एजेंडा?

कल शाम दिल्ली नगर निगम चुनाव के लिए मतदान खत्म हुआ। और सुना है कि उसके कुछ ही समय बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा एक आंदोलन भी समाप्त हो गया। क्या इन दो बातों के बीच कोई संबंध है? क्या वे आंदोलनकारी वाकई किसान थे या तमिलनाडु की किसी जनजाति के संपेरे थे? क्या वे वामपंथी गैंग के सदस्य थे या ग्रीनपीस एनजीओ के कार्यकर्ता थे? क्या ये सही है इंडिया टुडे के कुछ ‘पत्रकार’ (?) उनमें से कुछ लोगों को नोएडा के पास एक गांव के सूखे खेतों में फोटो खिंचवाने के लिए साथ ले गए और आगे पढ़ें …

संगीत की भाषा

भारत की लोकगीत-लोकसंगीत की परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। कुछ वर्षों पहले तक यह आशंका होती थी कि ये सब कलाएं, परंपराएं और संगीत कहीं अंग्रेज़ी पॉप कल्चर और बॉलीवुड की आंधी में उड़कर लुप्त न हो जाएं। लेकिन अब डिजिटल युग में ये चिंता दूर हो गई है। क्षेत्रीय भाषाओं-बोलियों के पारंपरिक गीत भी अब म्यूजिक अल्बम और वीडियो रिकॉर्डिंग के रूप में जाने-अनजाने में ही सुरक्षित-संरक्षित हो रहे हैं। करीब १०-१२ वर्षों पहले अपने कॉलेज के दिनों में जब मैं बालाघाट में रहता था, तो नवरात्रि के दौरान हर गली, हर पंडाल में शहनाज़ अख्तर के देवी-गीतों के आगे पढ़ें …

आपकी कला देश से बड़ी कैसे?

सीमा-पार पड़ोसी देशों से भारत में होने वाली घुसपैठ पिछले कुछ वर्षों से कला के क्षेत्र में भी हो रही है. कभी कोई गायक, कोई संगीतकार, कोई स्टैंड-अप कॉमेडियन, कोई अभिनेत्री और कभी क्रिकेटर इस देश में आ रहे हैं. भले ही पाकिस्तान में भारतीय गायकों-कलाकारों और चैनलों पर रोक लगी हो, लेकिन भारत में पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे शत्रु-देशों से आने वाले कलाकारों का समर्थन करने वालों की कमी नहीं है. इनके समर्थक भारतीय कलाकार अक्सर ये तर्क देते हैं कि “कला की कोई सीमा नहीं होती” या “हम सिर्फ कलाकार हैं, हमें राजनीति से कोई सरोकार नहीं है“. आगे पढ़ें …

भारत के युवा. . .

अक्सर ये चर्चा सुनाई देती है की भारत शीघ्र ही दुनिया के प्रमुख शक्तिशाली एवं विकसित देशो की श्रेणी में पहुँच जाएगा। इसके जो विभिन्न कारण गिने जाते है, उनमे एक मुख्या कारण यह है कि भारत कि लगभग ५०% जनसंख्या युवा है और यही युवा पीढ़ी भारत के उज्जवल भविष्य का निर्माण करेगी। समय के साथ-साथ जैसे सभी क्षेत्रो में परिवर्तन हुए है, उसी तरह शिक्षा के क्षेत्र में भी कई बदलाव हुए है। पारंपरिक विषयो के अलावा अनेक नए पाठ्यक्रम शुरू हुए हैं और आज भारतीय युवाओं के पास शिक्षा के विभिन्न विकल्प उपलब्ध हैं। इसका लाभ ये आगे पढ़ें …