आपातकाल की यादें – भाग -२ (अरुण जेटली)

आपातकाल के अत्याचार २६ जून १९७५ को आपातकाल लगाते ही श्रीमती इंदिरा गांधी ने धारा ३५९ के तहत नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। इसके परिणामस्वरूप अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता दोनों पर पाबंदी लगा दी गई। केवल सेंसर की अनुमति से प्रकाशित समाचार ही उपलब्ध थे। २९ तारीख को इंदिरा जी ने भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के नाम पर बीस-सूत्रीय कार्यक्रम की घोषणा की, हालांकि वास्तव में इसका उद्देश्य इस बात से ध्यान हटाना था कि भारत में लोकतंत्र को खत्म कर दिया गया है। इन बीस बिन्दुओं में कई तो वास्तव में आगे पढ़ें …

कॉमनवेल्थ: गुलामी की निशानी

सोलहवीं शताब्दी से ब्रिटेन ने दुनिया भर के देशों पर कब्जा करना और उन्हें गुलाम बनाना शुरू किया। इन देशों को ब्रिटिश कॉलोनियां या उपनिवेश कहा गया। इन देशों का शासन पूरी तरह ब्रिटिश सरकार के अधीन था। भारत भी इनमें से एक था। उन्नीसवीं शताब्दी में इन देशों को स्वतंत्रता या स्वायत्तता मिलना शुरू हुई। सन १८६७ में कनाडा को डोमिनियन का दर्जा मिला। इसका मतलब ये था कि अब कनाडा का शासन ब्रिटिश सरकार नहीं, बल्कि कनाडा के लोग ही चलाएंगे। लेकिन, कनाडा पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हुआ था। डोमिनियन होने का मतलब था कि अभी भी ब्रिटेन आगे पढ़ें …

शिमला समझौता

पिछले लेख में मैंने १९४७ में पाकिस्तान के जन्म से लेकर १९७१ में बांग्लादेश के जन्म तक के इतिहास के बारे में संक्षेप में आपको जानकारी दी थी। आज उसके आगे की बात करने वाला हूं। हालांकि कुछ बातों का संदर्भ स्पष्ट करने के लिए बीच-बीच में इतिहास के कुछ अन्य प्रसंगों का भी उल्लेख करूंगा। तो आइये कल की बात को आगे बढ़ाएं। १६ दिसंबर १९७१; केवल १३ दिनों की लड़ाई के बाद ही पाकिस्तान ने घुटने टेक दिए। युद्ध के दौरान वहां का सरकारी मीडिया लोगों को गलत खबर देता रहा कि पाकिस्तान बहुत मज़बूत स्थिति में है आगे पढ़ें …

विजय-दिवस

सन १९४७ में भारत 🇮🇳 का विभाजन हुआ और पाकिस्तान 🇵🇰 जन्मा। तब पाकिस्तान के दो हिस्से थे – एक पश्चिमी पाकिस्तान, जो आज का पाकिस्तान है और दूसरा पूर्वी पाकिस्तान, जो आज का बांग्लादेश है। इस नए राष्ट्र के जन्म के समय पश्चिमी हिस्से की तुलना में पूर्वी पाकिस्तान की जनसंख्या ज्यादा थी। देश की आमदनी में योगदान भी पूर्वी पाकिस्तान का ही ज्यादा था। लेकिन पूर्वी पाकिस्तान के निवासी महसूस करते थे कि उनके योगदान के बदले उन्हें उचित अधिकार और सम्मान नहीं मिल रहा है। बांग्ला भाषा को ऊर्दू जितना महत्व नहीं मिलता था, पूर्वी भाग के आगे पढ़ें …

प्रम्बानन: इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर

भारत के दक्षिण-पूर्व में हिन्द महासागर व प्रशांत महासागर के बीच फैला इंडोनेशिया विश्व का सबसे बड़ा द्वीप-राष्ट्र है। लगभग १९ लाख वर्ग किमी क्षेत्रफल के साथ यह विश्व का चौदहवां सबसे बड़ा देश है। जनसंख्या के मामले यह विश्व में चौथे स्थान पर है और यह विश्व में सर्वाधिक मुस्लिम जनसंख्या वाला राष्ट्र भी है। इंडोनेशिया में कुल १३ हजार द्वीप हैं, जिनमें सुमात्रा और जावा सबसे बड़े दो द्वीप हैं। इसी जावा द्वीप पर प्रम्बानन (Prambanan) नामक हिन्दू मंदिर स्थित है, जो कि इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर है। भारत में भले ही अधिकांश लोगों को इस आगे पढ़ें …

१५ अगस्त १९४७: स्वतंत्र देश या स्वतंत्र उपनिवेश?

अधिकतर लोगों को भ्रम है कि १५ अगस्त १९४७ को भारत एक स्वतंत्र देश बन गया था। लेकिन वास्तव में उस दिन भारत स्वतंत्र देश नहीं बना, बल्कि केवल एक स्वतंत्र उपनिवेश बना। इसका अर्थ ये है कि उस दिन केवल सत्ता का हस्तांतरण हुआ और शासन की बागडोर एक विदेशी वायसरॉय ने एक भारतीय मूल के प्रधानमंत्री को सौंपी। भारत उस दिन आजाद नहीं हुआ, भारत उस दिन एक स्वतंत्र देश नहीं बना, बल्कि भारत उस दिन केवल एक स्वतंत्र उपनिवेश बना, स्वतंत्र अधिराज्य बना। इसका अर्थ ये है कि भारत तब भी ब्रिटिश शासन के अधीन ही एक आगे पढ़ें …

औरंगज़ेब: क्रूरता का प्रतिमान

औरंगज़ेब

(दिल्ली की द्वारका EXPRESS पत्रिका के ‘औरंगजेब विशेषांक’ में प्रकाशित मेरा लेख) पिछले लगभग एक हजार वर्षों का भारत का इतिहास बर्बर विदेशी आक्रांताओं की क्रूरता और राष्ट्रवादी हिन्दुओं द्वारा इसके सफल प्रतिकार का इतिहास है। इन क्रूर शासकों की सूची में मुगल बादशाह औरंगज़ेब का नाम निसंदेह सबसे ऊपर है। अपने उनचास वर्षों के शासन काल में औरंगज़ेब ने हिन्दुओं पर भीषण अत्याचार किए, इस्लाम के नाम पर अनगिनत मंदिर ढहाए, गैर-मुस्लिमों पर जज़िया कर लगाया, लाखों लोगों की नृशंस हत्याएं करवाईं, कश्मीरी हिन्दुओं पर जबरन इस्लाम स्वीकारने का दबाव डाला, गुरु तेगबहादुर का शीश कटवा दिया और गुरु आगे पढ़ें …

श्री गुरुजी को अटलजी की श्रद्धांजलि (जून 1973)

शूलों की शय्या पर इच्छा-मरण – (श्री) अटलबिहारी वाजपेयी (५ जून १९७३) सवेरे का समय, चाय-पान का वक्त, पूजनीय श्री गुरुजी के कमरे में (उसे कोठरी कहना ही अधिक उपयुक्त होगा) जब हम लोग प्रविष्ट हुए तब वे कुर्सी पर बैठे हुए थे। चरण स्पर्श के लिए हाथ बढ़ाये। सदैव की भांति पाँव पीछे खींच लिये। मेरे साथ आये हुए स्वयंसेवकों का परिचय हुआ। उनमें आदिलाबाद के एक डॉक्टर थे। श्री गुरुजी विनोदवार्ता सुनाने लगे कि एक मरीज एक डॉक्टर के पास गया। डॉक्टर ने पूछा – क्या कष्ट है? सारी कहानी सुनाओ। मरीज बिगड़ गया और बोला – अगर आगे पढ़ें …

अजेय अपराजित योद्धा

आपने जूलियस सीज़र से लेकर सिकंदर तक और नेपोलियन से औरंगज़ेब तक न जाने कितने सम्राटों, सेनापतियों और योद्धाओं के बारे में पढ़ा होगा। लेकिन क्या आप मुझे उस सेनापति का नाम बता सकते हैं, जो अपने जीवन में एक भी लड़ाई न हारा हो? क्या आप मुझे उस कुशल प्रशासक का नाम बता सकते हैं, जिसने ग्वालियर के सिंधिया, इंदौर के होलकर और बडौदा के गायकवाड़ जैसे राजघरानों की नींव रखी? क्या आपने कभी उस महान भारतीय योद्धा का नाम भी सुना है? अविश्वसनीय पराक्रम का प्रदर्शन करने वाले उस अजेय अपराजित योद्धा का नाम है – पेशवा बाजीराव प्रथम! आगे पढ़ें …