भारत-बांग्लादेश भूमि सीमांकन करार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी बांग्लादेश यात्रा के दौरान कल भारत-बांग्लादेश भूमि सीमांकन करार पर हस्ताक्षर किए। इस करार के तहत भारत और बांग्लादेश के बीच ज़मीन की अदला-बदली की जाएगी। सोशल मीडिया पर कई लोग इस बात से नाराज़ हैं कि भारत ने अपने कुछ गाँव, कुछ ज़मीन बांग्लादेश को दे दी है। लेकिन आखिर यह करार क्या है, इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी और इससे भारत का क्या फायदा या नुकसान होगा? आइये इसके समर्थन या विरोध में कोई राय बनाने से पहले इस मामले के सभी पहलुओं को समझ लें। सन 1947 में भारत विभाजन के बाद रेडक्लिफ आगे पढ़ें …

काश्मीर में भाजपा-पीडीपी का गठबंधन

कुछ भाजपा समर्थक मित्रों की राय है कि मुफ़्ती की हरकतों को देखते हुए भाजपा को तुरंत कश्मीर सरकार से समर्थन वापस ले लेना चाहिए। लेकिन शायद प्रबल भावनाओं के प्रभाव में उन्होंने इस बात पर ध्यान नहीं दिया है कि इससे समस्या हल नहीं होगी बल्कि बढ़ेगी। 1. स्वाभाविक है कि भारत विरोधी विचारधारा वाले लोग नहीं चाहते कि जम्मू-कश्मीर सरकार में ऐसे लोगों का प्रभाव बढ़े, जिनकी निष्ठा भारत के प्रति है। इसलिए सरकार में भाजपा की हिस्सेदारी से कइयों को दर्द हो रहा है। आज जब इस आतंकी की जमानत का विरोध हो रहा है तो विपक्षी आगे पढ़ें …

नया चुनावी अनुभव…

वर्तमान लोकतांत्रिक प्रणाली में चुनाव यदि युद्ध है, तो मतदान केन्द्र युद्धभूमि और वोटिंग मशीन हथियार है. कल 17 अप्रैल को मैंने भी पूरा दिन इसी युद्धभूमि में बिताया और एक निर्वाचन बूथ पर अपनी पार्टी के मित्रों के साथ मतदाताओं का सहयोग किया. पिछले कई वर्षों से मैं मप्र भाजपा की आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया पर फेसबुक व ट्विटर के ज़रिए ऑनलाइन गतिविधियों में सहयोग करता रहा हूँ, लेकिन आज पहली बार पूरा एक दिन ‘ग्राउंड-वर्क’ के लिए दिया. ऑनलाइन कार्य और ज़मीनी कार्य में क्या अंतर है, मतदाताओं का विश्वास जीतने के लिए क्या-क्या करना और क्या-क्या आगे पढ़ें …

वरुण गाँधी पर NSA; आतंकियों पर क्या?

पिछले कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से भा.ज.पा. के उम्मीदवार वरुण गाँधी के कुछ भाषणों को लेकर देश भर में विवाद जारी है . वरुण पर आरोप है की उन्होंने अपने भाषण में एक धर्म के लोगो को दूसरे संप्रदाय के विरुद्ध भड़काया है, जो कि देश की एकता के लिए घातक है. स्वाभाविक रूप से इस प्रकार के भाषण की चर्चा होते ही देश भर में हंगामा और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. चूंकि, ये चुनाव का मौसम है, इसलिए कोई भी राजनैतिक दल इस मुद्दे से लाभ उठाने में पीछे नहीं रहना चाहता. वरुण गाँधी को आगे पढ़ें …