फ्रांस राष्ट्रपति चुनाव २०१७

(२००७ चुनाव का चित्र, वीकिपीडिया से)

आज २३ अप्रैल को फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान हो रहा है। पिछले दो वर्षों में, विशेषतः सीरिया में जारी युद्ध, आइसिस के उभार और यूरोप में बढ़े शरणार्थी संकट के बाद से परिस्थिति बहुत संवेदनशील हो गई है। अधिकांश देशों में शरणार्थियों के मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया और आपसी विरोध दिखाई पड़ रहा है। हर देश में कुछ गुट या पार्टियां इनके समर्थन में हैं और कुछ पूरी तरह विरोध में। इसके अलावा यूरोपीय देशों के लोग हाल ही में उभरी कुछ अन्य समस्याओं, जैसे बढ़ते अपराधों और आतंकी हमलों से भी चिंतित लग रहे हैं। कुछ ही महीनों पूर्व ब्रिटेन के लोगों ने यूरोपीय यूनियन से अलग होने के पक्ष में मतदान किया था और अब वह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उस मुद्दे पर भी ब्रिटेन के लोगों में आपसी कटुता बहुत स्पष्ट रूप से दिखी थी। यहां तक कि ब्रिटेन के ही एक भाग ‘नॉर्दर्न आयरलैंड’ ने तो यह घोषणा भी कर दी कि वह ब्रिटेन से अलग होकर एक स्वतंत्र देश बनने के बारे में लोगों की राय लेगा।

पिछले साल नवंबर में अमरीका में संपन्न हुए राष्ट्रपति चुनाव के पूरे अभियान के दौरान भी अमरीका के लोग इस तरह बंटे हुए दिखे। आज भी वहां के लोग ट्रंप प्रशासन के समर्थन और विरोध में बहुत उग्र दिखाई पड़ रहे हैं। यही हाल फ्रांस के राष्ट्रपति चुनाव के मामले में भी दिख रहा है। आतंकवाद इस समय फ्रांस की एक बड़ी चुनौती है। जनवरी २०१५ में चार्ली हेब्दो पत्रिका के कार्यालय पर हुए आतंकी हमले के बाद से कल २२ अप्रैल की चाकूबाजी की घटना तक फ्रांस में पिछले २ वर्षों में कम से कम १७ आतंकी वारदातें हो चुकी हैं। स्वाभाविक रूप से लोग आतंकवाद के मामले में सरकार का कड़ा रुख देखना चाहते हैं। लेकिन जैसा अमरीका, जर्मनी या भारत में होता है, उसी तरह फ्रांस में भी कुछ राजनैतिक दल आतंकवाद के विरुद्ध कड़ी बातें कर रहे हैं जबकि कुछ किसी न किसी बहाने इसे समस्या मानने से बचने की कोशिश में दिख रहे हैं। इसी तरह मतदाता भी अनिश्चय की स्थिति में लग रहे हैं। तो आखिर चुनाव का परिणाम क्या होगा? फिलहाल तो इस बारे में हम केवल अनुमान ही लगा सकते हैं। तो आइए इस लेख में फ्रांस की राजनैतिक प्रणाली और फ्रांस के वर्तमान चुनाव की परिस्थितियों और मुख्य दावेदारों के बारे में जानें।

फ्रांस की राजनैतिक प्रणाली
फ्रांस में राष्ट्रपति प्रणाली है, जिसके अंतर्गत यहां के मतदाता प्रत्यक्ष मतदान के द्वारा ५ वर्षों के लिए अपना राष्ट्रपति चुनते हैं। २००२ से पहले तक यह अवधि ७ वर्ष की होती थी। इसी तरह पहले इस बात की भी कोई सीमा नहीं थी कि कोई व्यक्ति कितनी बार राष्ट्रपति पद पर निर्वाचित हो सकता है, लेकिन २००७ में यह नियम बदला गया और अब कोई भी व्यक्ति लगातार दो से ज्यादा बार राष्ट्रपति नहीं बन सकता। राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनने के लिए कम से कम ५०० निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का समर्थन मिलना आवश्यक है, तभी कोई व्यक्ति यह चुनाव लड़ सकता है।

भारतीय चुनाव आयोग के समान ही फ्रांस में भी एक स्वतंत्र संस्था द्वारा चुनाव की निगरानी की जाती है। चुनाव प्रचार पर होने वाले खर्च के लिए अधिकतम २ करोड़ यूरो की सीमा निर्धारित है। यदि कोई प्रत्याशी ५% से अधिक मत पा लेता है, तो इस खर्च सीमा की ५०% राशि उसे सरकारी खजाने से लौटा दी जाती है, जबकि ५% से कम वोट पाने वाले प्रत्याशी को ८० लाख यूरो तक कि राशि लौटाई जाती है। टीवी पर प्रचार करना मना है, लेकिन सभी प्रत्याशियों को अपनी बात रखने के लिए टीवी पर समय दिया जाता है।

राष्ट्रपति की शक्तियां और अधिकार
हालांकि फ्रांस में संसद और प्रधानमंत्री भी होते हैं, लेकिन इसके बावजूद राष्ट्रपति का पद बहुत शक्तिशाली है और राष्ट्रपति के पास कई विशेष अधिकार होते हैं।

फ्रांस का राष्ट्रपति कार्यपालिका (नौकरशाही) और विधायिका (संसद) दोनों का प्रमुख होता है। वह नौकरशाहों और न्यायाधीशों की नियुक्ति कर सकता है, संधियों व समझौतों को स्वीकृति देता है, वही सेना का सुप्रीम कमांडर और परमाणु हथियारों का नियंत्रक भी है। किसी कानून की संवैधानिकता का निर्णय करने वाली संविधान समिति के अध्यक्ष सहित इसके ९ में से ३ सदस्य राष्ट्रपति द्वारा ही चुने जाते हैं।

प्रधानमंत्री की नियुक्ति भी राष्ट्रपति द्वारा ही की जाती है। सामान्यतः राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों एक ही पार्टी के होते हैं, लेकिन अब तक ३ बार ऐसी स्थिति बनी है, जब संसद में बहुमत दूसरी पार्टी का था, इसलिए राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री दोनों अलग-अलग दलों के थे। स्वाभाविक रूप से ऐसी स्थिति में दोनों के बीच टकराव भी होता है, लेकिन अधिक शक्तिशाली राष्ट्रपति ही है। राष्ट्रपति संसद के पास नियंत्रण में नहीं होता, लेकिन यदि ऐसा लगे कि यह अपना कर्तव्य पूरा नहीं कर पा रहा है, तो संसद उस पर महाभियोग चला सकती है। राष्ट्रपति जब तक अपने पद पर है, तब तक उस पर कोई मुकदमा नहीं चलाया जा सकता और न किसी मुकदमे में उसे गवाह के तौर पर बुलाया जा सकता है। राष्ट्रपति के पास कैदियों की सज़ा माफ करने या कम करने का अधिकार भी होता है।

वास्तव में राष्ट्रपति केवल मतदाताओं के प्रति उत्तरदायी होता है और उसकी अगली परीक्षा केवल उसी समय होती है, जब वह दोबारा चुनाव के समय मतदाताओं से वोट मांगने जाता है। वर्तमान राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद की लोकप्रियता इतनी गिर चुकी है कि उन्होंने दोबारा चुनाव लड़ने से ही इनकार कर दिया है।

संसद
भारत के समान ही फ्रांस की संसद में भी दो सदन हैं: एक नैशनल असेंबली (लोकसभा), जिसके सभी ५७७ सदस्यों का चयन आम मतदाताओं के मतों से ५ वर्ष के लिए होता है, और एक सीनेट (राज्यसभा), जिसके कुल ३४८ सदस्यों में से ३२८ का चयन मेट्रोपोलिटन फ्रांस (मुख्यभूमि) के सभी ९६ जिलों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के मतदान द्वारा ६ वर्ष के लिए होता है। इसके अतिरिक्त ८ सदस्य फ्रांस के डिपेंडेंसी क्षेत्रों (अर्थात दक्षिण अमरीका, अफ्रीका आदि के फ्रांसीसी क्षेत्रों, प्रशांत महासागर में फ्रांस के द्वीपों) से चुने जाते हैं और १२ सदस्य विदेशों में रहने वाले फ्रांसीसी नागरिकों के राजनैतिक संगठन ‘असेंबली ऑफ फ्रेंच सिटीजन्स लिविंग अब्रॉड’ द्वारा चुने जाते हैं।

वर्तमान चुनाव
फ्रांस के वर्तमान राष्ट्रपति चुनाव में कुल ११ प्रत्याशी हैं, लेकिन मैं इनमें से ३ को ही प्रमुख दावेदार मान रहा हूं। ये ४ हैं: नैशनल फ्रंट की मरीन ले पेन, एन मार्श के इमैनुएल मैक्रों और द रिपब्लिकन्स के फ्रांस्वा फिलों।

फ्रांस्वा फिलों

इस चुनाव में कुल ४.७ करोड़ स्थानीय मतदाता हैं, जबकि १३ लाख मतदाता विदेशों में रह रहे हैं। अभी तक हुए सर्वेक्षणों के आधार पर किसी भी उम्मीदवार को स्पष्ट समर्थन मिलता नहीं दिख रहा है और लोगों की राय बंटी हुई लग रही है। ऐसा लग रहा है कि लगभग एक तिहाई लोग अभी तक अनिश्चय की स्थिति में हैं और संभावना है कि लगभग २५% लोग मतदान में भाग ही नहीं लेंगे।

इमैनुएल मैक्रों

पिछले चुनाव में २०% और उससे पहले वाले चुनाव में १६% लोगों ने मतदान नहीं किया था।

फ्रांस के चुनाव में जीत के लिए प्रत्याशी को कम से कम ५०% वोट पाना आवश्यक होता है। यदि आज होने वाले चुनाव में किसी प्रत्याशी को इतने वोट नहीं मिले, तो इस राउंड में सबसे ज्यादा वोट पाने वाले दो प्रत्याशियों के बीच ७ मई को फिर से मुकाबला होगा। उस राउंड में जिसे सबसे ज्यादा वोट मिलेंगे, वही राष्ट्रपति चुना जाएगा। इसके बाद जून में नैशनल असेंबली के लिए भी दो चरणों में मतदान होगा।

इन चार उम्मीदवारों में से कुछ समय पहले तक पूर्व प्रधानमंत्री फ्रांस्वा फिलों ही सबसे मजबूत दावेदार लग रहे थे। लेकिन उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण उनकी स्थिति अब कुछ कमजोर लग रही है। उन्होंने जीतने पर आर्थिक सुधार लागू करने, अमीरों पर लगने वाला वेल्थ टैक्स खत्म करने और स्वास्थ्य बीमा प्रणाली में परिवर्तन करने के वादे किए हैं।

३९ वर्षीय मैक्रों फ्रांस में अब तक के सबसे युवा प्रत्याशी हैं। कुछ समय तक उन्होंने इन्वेस्टमेंट बैंकर के रूप में काम किया, फिर वे वित्त और उद्योग मंत्री भी रहे हैं और कुछ वर्षों तक सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य और उसके बाद निर्दलीय के रूप में काम करने के बाद अब उन्होंने अपनी नई पार्टी बनाई है। मैक्रों यूरोपियन यूनियन के समर्थक हैं और राष्ट्रपति बनने पर फ्रांस में आर्थिक सुधार लागू करना चाहते हैं।

मरीन ले पेन

नैशनल फ्रंट की प्रत्याशी मरीन ले पेन पेशे से वकील हैं और इससे पहले २०१२ का राष्ट्रपति चुनाव भी लड़ चुकी हैं। उस समय पहले राउंड में वह लगभग १८% वोट पाकर तीसरे स्थान पर रही थीं। नैशनल फ्रंट की स्थापना उनके पिता ने की थी और २०११ में उन्हीं से संघर्ष करके ले पेन ने पार्टी का अध्यक्ष पद पाया। अपने घोषणापत्र में उन्होंने फ्रांस की मुद्रा के रूप में यूरो का उपयोग बंद करने, शरणार्थियों के प्रवेश को प्रतिबंधित करने, सीमाओं को सुरक्षित बनाने और आर्थिक सुधार लागू करने की बात कही है। कुछ समाचारों के अनुसार उन्होंने फ्रांस में सभी मस्जिदों पर प्रतिबंध लगाने की बात भी की है। उन्होंने यूरोपियन यूनियन को छोड़ने के मुद्दे पर ब्रिटेन में हुए जनमत संग्रह के समान ही फ्रांस में भी जनमत संग्रह करवाने की भी घोषणा की है।

फ्रांस के इस चुनाव पर पूरी दुनिया की नज़रें टिकी हुई हैं। यदि फ्रांस वाकई यूरोपियन यूनियन से बाहर निकल गया, तो निश्चित रूप से यूरोपियन यूनियन बिखरकर समाप्त हो जाएगा। इस चुनाव में किसकी जीत होगी, यह तो जल्दी ही पता चल जाएगा, लेकिन फिलहाल मुझे मरीन ले पेन के जीतने की ही संभावना लग रही है। आपको क्या लगता है?

स्रोत:
१. https://en.m.wikipedia.org/wiki/List_of_terrorist_incidents_in_France
२. https://en.m.wikipedia.org/wiki/President_of_France
३. https://www.thelocal.fr/20170422/what-can-a-french-president-actually-do
४. https://en.m.wikipedia.org/wiki/Elections_in_France
५. https://www.thelocal.fr/20170422/french-voters-the-numbers-you-need-to-know
६. https://en.m.wikipedia.org/w/index.php?title=French_presidential_election,_2017

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