कश्मीर…

पाकिस्तान की आज की हरकतों को देखकर फिर एक बार यह स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान हमसे बात करना ही नहीं चाहता। मुझे तो यही लगता है कि पाकिस्तान से बात करने का कोई फायदा भी नहीं है और न उससे कुछ हासिल होने वाला है। पाकिस्तान की रुचि कश्मीर मुद्दे को सुलझाने से ज्यादा उलझाए रखने में है क्योंकि इससे उसको दोहरा फायदा होता है। एक तो कश्मीर की मुक्ति के नाम पर पाकिस्तान भारत में आतंकवाद फैलाकर यहां अशांति और अस्थिरता कायम रख पाता है और दूसरी तरफ वहां की सरकारों और नेताओं को बाहर से करोड़ों का चन्दा भी मिलता रहता है। पाकिस्तानी शासक अपनी आंतरिक समस्याओं से लोगों का ध्यान हटाने के लिए भी कश्मीर की रट लगाते रहते हैं। इसलिए कश्मीर समस्या को कायम रखना उनके हित में है, अतः वे न तो कभी कोई बातचीत सफल होने देंगे और न कश्मीर समस्या या आतंकवाद का कोई समाधान निकलने देंगे। इसलिए पाकिस्तान से शान्ति की उम्मीद करना और किसी तरह की बातचीत करना बेकार है।
लेकिन युद्ध भी नहीं किया जा सकता क्योंकि युद्ध बहुत महंगा सौदा है। युद्ध में न सिर्फ खर्च बहुत ज्यादा होगा, बल्कि अस्थिरता फ़ैल जाएगी, विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ता देश ठहर जाएगा और युद्ध के कारण हम फिर विकास के मामले में पीछे चले जाएंगे। इसके अलावा परमाणु हमले का खतरा भी है। इसलिए युद्ध आखिरी विकल्प होना चाहिए।
लेकिन पाकिस्तान का इलाज करना भी जरूरी है। अगर बातचीत भी नहीं और युद्ध भी नहीं तो उसकी अकल ठिकाने लगाने के लिए क्या किया जाए?
ये ग्लोबलाइजेशन का युग है, व्यापार का युग है, पूंजीवाद का युग है। तो क्यों न आर्थिक मोर्चे पर पाकिस्तान की कमर तोड़ दें?
मेरे ख्याल से भारत को पाकिस्तान से सारे व्यापारिक रिश्ते तोड़ लेने चाहिए। न तो भारत का माल पाकिस्तान जाने दिया जाए और न वहां से कोई सामान खरीदकर भारत लाया जाए। बॉर्डर बंद कर दी जाए। भारत और पकिस्तान के बीच ट्रेन, बस और हवाई सेवा रोक दी जाए। पाकिस्तानी विमानों के लिए भारतीय हवाई क्षेत्र का उपयोग प्रतिबंधित कर दिया जाए। पाकिस्तानियों को वीजा न दिया जाए और जितने पाकिस्तानी नागरिक इस समय वीजा लेकर भारत में हैं, उन्हें तुरंत वापस जाने का आदेश दे दिया जाए। जितने पाकिस्तानी कलाकार भारत में हैं, उनकी भारत में संपत्ति हो तो उसे जब्त करके उन्हें पाकिस्तान वापस भेज दिया जाए। क्रिकेट और अन्य कोई खेल पाकिस्तान के साथ न खेले जाएं। जो देश आतंकवादी भेजकर लगातार हमारे साथ युद्ध कर रहा है, उसके साथ व्यापार करने, क्रिकेट खेलने या गीत गाने की कोई ज़रूरत नहीं है।
दूसरी तरफ कश्मीर में या देश-भर में कहीं भी हुर्रियत जैसे जितने भी अलगाववादी संगठन, नेता और पाकिस्तान से सहानुभूति रखने वाले लोग हैं, उनके बैंक खातों की जांच की जाए, उनकी आय के स्त्रोत खंगाले जाएं और उनके फोन रिकॉर्ड की जांच की जाए। निश्चित रूप से हमें पाकिस्तान से उनके लिंक और उन्हें मिलने वाली आर्थिक मदद की जानकारी मिलेगी। उस आधार पर इन सभी लोगों पर उचित कार्यवाही होनी चाहिए और आतंकवादियों की मदद करने या उन्हें आर्थिक सहायता देने वालों पर जो क़ानून और धाराएं लागू होती हैं, वही इन लोगों पर लागू होने चाहिए। साथ ही, यही लोग भारतीय सेना पर पत्थर फेंकने और हमले करने वालों को उकसाते और मदद करते हैं। इसलिए देश में अस्थिरता फैलाने व भारत के खिलाफ विद्रोह करने के मुकदमे भी इन पर चलाए जाने चाहिए।
कश्मीर में पाकिस्तान के झंडे लहराने वालों ने अब आईएसआईएस के झंडे लहराना भी शुरू कर दिया है। ऐसे लोगों को सीधे गोली मार देनी चाहिए। अगर इसकी प्रतिक्रिया में कोई उपद्रव या हिंसा होती है, तो कश्मीर में तैनात भारतीय सेना निपटने में सक्षम है।
तीसरी तरफ पाकिस्तान से अलग होने की मांग कर रहे बलोच नेताओं और संगठनों की भारत को पूरी मदद करनी चाहिए। 1947 से ही वे पाकिस्तान के अत्याचारों, उपेक्षा और अन्याय का शिकार हैं। जिस तरह 1971 में बांग्लादेश को पाकिस्तान से छुटकारा मिला था, उसी तरह बलूचिस्तान के लोगों को भी पाकिस्तान से शिकंजे से मुक्ति मिलना आवश्यक है और इसमें उनकी मदद करने में भारत का फायदा भी है।
इन सब उपायों से भारत के बजाय पाकिस्तान को ही ज्यादा नुकसान होगा और तभी वह झुकेगा। लेकिन अगर इसके बावजूद भी वह सुधरने के बजाय लड़ने के रास्ते पर ही चलता है, तो लड़ाई के मैदान में उसे धूल चटाने में भी भारतीय सेना सक्षम है!

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