मालदीव की हमारी यात्रा

हाल ही में, मैं मालदीव की यात्रा से लौटा हूं। मेरी यात्रा का विवरण आपके लिए इस पोस्ट में शेयर कर रहा हूं।

रिसॉर्ट

मैं अपने परिवार के साथ १४ अप्रैल की रात में मालदीव पहुंचा। चूंकि शाम ७ बजे के बाद रिसॉर्ट पर जाने की सुविधा उपलब्ध नहीं थी, इसलिए हमने पहले ही हुलहुमाले के एक होटल में कमरा बुक करवा लिया था। हुलहले द्वीप के पास ही हुलहुमाले एक नया द्वीप है, जो समुद्र को पाटकर बनाया गया है। एक पुल इन दोनों द्वीपों को जोड़ता है। हुलहुमाले बहुत सुनियोजित और व्यवस्थित तरीके से बसाया जा रहा छोटा-सा नगर है। यहां अनेक होटल, रेस्तरां, दुकानें आदि हैं। रातभर हम यहां के एक होटल में ठहरे। हमारे कमरे के ठीक सामने कुछ ही मीटर की दूरी पर समुद्रतट था। अगली सुबह कमरे की खिड़की से सूर्योदय के सुंदर दृश्य देखा और ताज़े नारियल पानी का मज़ा लिया। दोपहर लगभग १२ बजे फिर एयरपोर्ट पहुंचे, जहां से हमें रिसॉर्ट तक ले जाने के लिए उनकी स्पीड बोट उपलब्ध थी। लगभग २० मिनट की समुद्री यात्रा के बाद रिसॉर्ट पहुंचे और चेक-इन की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद समुद्रतट के पास अपने बंग्लो में आए। दरवाजे से बाहर निकलते ही सामने सुंदर समुद्रतट था। चूंकि यह रिसॉर्ट का निजी बीच था, इसलिए यहां कोई भीड़भाड़ नहीं थी। साथ ही, यहां के हर रिसॉर्ट में मैंने एक बात देखी कि किनारे से काफी दूरी पर ही पत्थरों की दीवार बनाकर समुद्र की लहरों को रोक दिया जाता है, ताकि किनारे पर पानी बहुत गहरा भी नहीं रहता और ज्यादा लहरें भी नहीं उठतीं। इसलिए आराम से समुद्र में नहाने का मज़ा लिया जा सकता है। हमने पूरा दिन इसी तरह मज़े से बिताया और शाम को सागर किनारे सूर्यास्त का सुंदर दृश्य देखा। इसके बाद रात में रिसॉर्ट के ही एक रेस्तरां में भोजन किया। चारों ओर पानी से घिरे रेस्तरां में चांदनी रात में खुले आकाश के नीचे बैठकर भोजन करना भी एक अद्भुत अनुभव था।

अगले दिन भी सुबह सूर्योदय का मनोरम दृश्य देखने के बाद रिसॉर्ट में घूमे, पूरे द्वीप का चक्कर लगाया, समुद्र में स्नान का मज़ा लिया और दोपहर में विश्राम के बाद फिर शाम को सूर्यास्त देखने का लुत्फ उठाया। आज रात का भोजन कल वाले रेस्तरां की बजाय दूसरी तरफ वाले समुद्र तट पर था। यहां एक स्टेज पर कुछ गायक और वादक लाइव प्रस्तुति दे रहे थे। उनके गीतों को सुनते-सुनते समुद्रतट पर भोजन का भी अपना अलग मज़ा था।

एयरपोर्ट

अगले दिन हम दोपहर लगभग १२ बजे रिसॉर्ट छोड़कर वापस एयरपोर्ट के लिए निकले। हालांकि हमारी वापसी की फ्लाइट रात ९ बजे थी और हम रिसॉर्ट में ही शाम तक समय बिता सकते थे, लेकिन मेरी इच्छा माले शहर को भी देखने की थी। इसलिए हम दोपहर में ही रिसॉर्ट से निकले और पहले एयरपोर्ट गए।

मालदीव का इब्राहिम नासिर हवाई अड्डा यहां का मुख्य अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है। हवाई अड्डा बहुत छोटा है, लेकिन यहां से विश्व के अनेक देशों के लिए उड़ानें उपलब्ध हैं। इसके पीछे कुछ ही दूरी पर समुद्री हवाई जहाजों का हवाई अड्डा भी है। यह समुद्री हवाई जहाजों का विश्व में सबसे बड़ा परिचालन क्षेत्र है। इन हवाई जहाजों का उपयोग मालदीव के अन्य द्वीपों तक यात्रा के लिए किया जाता है। मालदीव में कुल २ अंतर्राष्ट्रीय और ११ अंतर्देशीय हवाई अड्डे हैं।

मैंने यह पहला एयरपोर्ट देखा, जहां लोग चाहें तो हवाई अड्डे से बाहर निकलते ही कार या टैक्सी की बजाय सीधे नाव या स्पीडबोट की सवारी कर सकते हैं! हवाई अड्डे से बाहर निकलते ही सामने सुंदर नीला महासागर आपका स्वागत करता है और यात्रा की पूरी थकान पल भर में ही मिट जाती है।

यहां हवाई अड्डे पर एक बैगेज काउंटर भी उपलब्ध है, जहां आप प्रति बैग ६ अमरीकी डॉलर का शुल्क देकर २४ घंटों के लिए अपना सामान छोड़ सकते हैं, ताकि आपको हर जगह उसे ढोना न पड़े। हमने रिसॉर्ट से हवाई अड्डे पर आकर अपने बैग इसी काउंटर पर छोड़ दिए और पास ही मौजूद बैंक ऑफ मालदीव के काउंटर पर कुछ अमरीकी डॉलर देकर मालदीव की मुद्रा (रूफिया) ले ली। पास ही में माले शहर तक जाने वाली बोट का टिकट मिलता है, जिसकी कीमत १० रूफिया है। नावें २४ घंटे चलती हैं और दिनभर लगभग हर १५ मिनट में व आधी रात के बाद हर आधे घंटे में उपलब्ध रहती हैं, हालांकि आधी रात के बाद किराया १५ रूफिया लगता है। माले शहर एयरपोर्ट के ठीक सामने कुछ ही दूरी पर दिखाई देता है और लगभग १० मिनट में नाव वहां पहुंचा देती है।

माले शहर की एक सड़क

समुद्र में कई द्वीपों के रूप में बिखरे हुए इस देश की राजधानी माले शहर भी लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबाई और एक किमी चौड़ाई वाले एक छोटे-से द्वीप पर बसा हुआ है। केवल आधे-पौन घंटे की पैदल सैर में आप पूरे शहर को नाप सकते हैं। यह विश्व से सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाले शहरों में से एक है। जगह की कमी के कारण सड़कें और गलियां बहुत संकरी हैं। दोपहिया वाहन बहुत ज्यादा संख्या में हैं। हर सड़क के एक किनारे पर खड़े दोपहिया वाहनों की बहुत लंबी कतारें हर जगह दिखीं। स्वाभाविक रूप से कारों की संख्या बहुत कम है क्योंकि शहर ही इतना छोटा है कि कार के बिना काम चल सकता है और गलियां इतनी संकरी और भीड़ भरी हैं कि कार न चलाना ही ज्यादा सुविधाजनक है। हालांकि यहां टैक्सियां उपलब्ध हैं, लेकिन विशेष ये है कि टैक्सियों में मीटर नहीं होते और न कोई मोलभाव करना पड़ता है। शहर में कहीं भी जाने की एक ही दर २५ रूफिया (मालदीव की मुद्रा) तय है। अगर आप डिक्की में सामान रखवाते हैं, तो ५ रूफिया अतिरिक्त लगेंगे। माले के किनारे पर उतरकर हमने नेशनल म्यूज़ियम जाने के लिए टैक्सी ली और भीड़भाड़ वाली संकरी गलियों से होते हुए १० मिनट में वहां पहुंच गए। पुराने समय में यहीं सुल्तान का महल हुआ करता था, जिसे कुछ वर्षों पहले ढहा दिया गया। उस परिसर की केवल यह तीन मंज़िला इमारत बची रह गई, जहां अब राष्ट्रीय संग्रहालय है। इस पुरानी इमारत का जीर्णोद्धार चीन की सरकार ने करवाया है।

नैशनल म्यूज़ियम देखने के लिए विदेशियों को १०० रूफिया शुल्क देना पड़ता है। अंदर निचली मंज़िल पर मालदीव के पुराने शासकों व पुरानी मस्जिदों की कुछ वस्तुएं, प्राचीन काल के कुछ सिरेमिक और धातुओं के बर्तन, जो चीन और भारत के लोगों के साथ यहां पहुंचे थे, मालदीव का पहला टाइपराइटर, फोन व कुछ अन्य मशीनें आदि हैं। यहां एक शेल्फ में अमरीका के अपोलो यान द्वारा चांद से लाए गए चार कंकड़ और उस यान के साथ चांद की यात्रा करके लौटा मालदीव का राष्ट्रध्वज भी रखा है। इसी मंज़िल पर एक तरफ पुलिस संग्रहालय भी है, जहां मालदीव की पुलिस व्यवस्था का पूरा इतिहास देखने को मिलता है। दूसरी तरफ एक कमरे में डाक टिकटों का संग्रहालय है। ऊपर पहली मंज़िल पर पुराने राजाओं के सिंहासन, कुछ वस्त्र, पगड़ियां, छड़ी, घड़ियां आदि निजी उपयोग की वस्तुएं प्रदर्शित हैं। इसी हॉल में कुछ पारंपरिक वाद्य, आम रसोईघरों में उपयोग किए जाने वाले लकड़ी और नारियल से बने कुछ बर्तन आदि हैं। मालदीव की विभिन्न लिपियों उनके विकासक्रम की जानकारी देने वाले कुछ पटल भी हैं। मछली की एक दुर्लभ प्रजाति का लगभग ७ फीट लंबा कंकाल भी यहां हॉल के बीचोंबीच प्रदर्शित है।

नैशनल म्यूज़ियम के अन्य फोटो आप यहां क्लिक करके मेरे फेसबुक पेज पर देख सकते हैं।

नैशनल म्यूज़ियम के ठीक पीछे ही यहां की विशाल मस्जिद  है, जिसका सुनहरा गुंबद और ऊंची मीनार बहुत दूर से भी दिखाई पड़ जाते हैं। मस्जिद के उस पार राष्ट्रपति के कार्यालय सहित अनेक मंत्रालयों की इमारतें हैं। उन इमारतों के सामने वाली सड़क के दूसरी ओर विशाल महासागर पसरा हुआ है, और सामने प्रेसिडेंशियल जेटी (जहां राष्ट्रपति की नाव खड़ी रहती है) और अन्य द्वीपों पर आम नागरिकों के आने जाने के लिए विभिन्न जेटियां हैं।

मालदीव में १९८८ में एक श्रीलंकाई उग्रवादी संगठन ने तख्तापल्ट का असफल प्रयास किया था। उस संघर्ष में यहां के कुछ नागरिकों और सैनिकों की भी जान गई। उनके सम्मान में एक स्मारक भी मस्जिद के ठीक बगल में ही बना हुआ है। इसी गली में आगे मालदीव की नेशनल गैलरी, ब्रिटिश काउंसिल की इमारत, सुल्तान पार्क आदि हैं। आगे बढ़ने पर पास ही में राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास और उसके सामने यहां की पुरानी मस्जिद है। सामने ‘मेदुज़ियाराई’ नामक मजार है। मालदीव के लोग इसे अत्यंत पवित्र स्थान मानते हैं। यह मौलाना अबुल बरकत की मज़ार है और ऐसी मान्यता है कि उनके प्रयासों से ही मालदीव के राजा ने बौद्ध धर्म को त्यागकर इस्लाम अपनाया था, जिसके बाद से मालदीव पूरी तरह इस्लामिक देश बन गया।

माले में घूमते समय कई बार लगा कि मैं समय में ५० साल पीछे चला गया हूँ। भारत में हम हर जगह सुरक्षा और तलाशी के तामझाम से परेशान रहते हैं। लेकिन यहां ऐसी कोई स्थिति नहीं थी। राष्ट्रपति निवास, राष्ट्रपति का कार्यालय, विदेश मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, यहां का राष्ट्रीय संग्रहालय, नैशनल गैलरी आदि सब देखा, लेकिन कहीं कोई सुरक्षा गार्ड, बैरिकेड कुछ भी नहीं था। मुझे तो अचरज हुआ कि राष्ट्रपति के आधिकारिक निवास के बाहर गेट खोलने तक के लिए एक व्यक्ति भी तैनात नहीं है! बाहर सड़क पर दो चमचमाती मर्सिडीज कारें खड़ी थीं। कोई अचरज की बात नहीं होगी, यदि वे राष्ट्रपति के काफिले की आधिकारिक कारें रही हों।

राष्ट्रपति निवास

अपने देश में शायद ५०-६० साल पहले ऐसा माहौल रहा होगा, जब हर जगह आज के समान सुरक्षा जांच और प्रतिबंध नहीं होते थे कि आप कहाँ क्या ले जा सकते हैं और क्या नहीं। अपने देश में तो अब मंदिर या मॉल जैसी जगहों पर भी पहले मेटल डिटेक्टर से गुजरना पड़ता है, खुद की और सामान की तलाशी देनी पड़ती है। कहीं फोन बाहर रखना पड़ता है, कहीं पर्स। राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री निवास, संसद, मंत्रालयों के भवन आदि इमारतों में तो शायद देश का आम आदमी आसानी से गेट के बाहर तक भी नहीं पहुंच सकता। इसके विपरीत माले में बिना भीड़भाड़, बिना सुरक्षा, बिना तामझाम वाली इन इमारतों को देखना, फोटो खींचना, समय बिताना बहुत अलग अनुभव था!

इन सब स्थानों को देखने के बाद हम वापस एयरपोर्ट आ गए और कुछ घंटों बाद वहां से निकलकर अगले दिन सुबह सिंगापुर लौट आए। इस प्रकार मालदीव की हमारी सुखद व अविस्मरणीय यात्रा समाप्त हुई।

मालदीव के इतिहास और इस देश के बारे में आपको जानकारी देने के लिए मैंने एक और पोस्ट लिखी है। उसे आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं

मालदीव के कुछ अन्य फोटो आप यहां क्लिक करके मेरे फेसबुक पेज पर देख सकते हैं

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