मरहबा नमो…

(17 अगस्त 2015 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी यूएई यात्रा के दौरान दुबई में बसे भारतीयों को संबोधित किया। यह ब्लॉग पोस्ट इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में उपस्थित रहे एक प्रवासी भारतीय मित्र श्री शशांक गिरडकर के मूल मराठी लेख का हिन्दी अनुवाद है।)
==============================================================
(यह राजनैतिक पोस्ट नहीं है, इसलिए कृपया उस अर्थ में न लें। दुबई क्रिकेट स्टेडियम से एक प्रत्यक्षदर्शी की रिपोर्ट।)

‘मरहबा नमो’
‘अरबी भाषा में ‘मरहबा का अर्थ है ‘सुस्वागतम’। 17 अगस्त को इसी नाम से एक कार्यक्रम दुबई क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित किया गया था, और मैं स्वयं को भाग्यशाली समझता हूं कि मैं इस कार्यक्रम में उपस्थित रह सका। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जब से दो दिनों के संयुक्त अरब अमीरात के दौरे पर आए हैं, तभी से यहाँ चारों तरफ माहौल मोदीमय हो गया था। यहाँ के समस्त स्थानीय मीडिया में मोदीजी के बारे में चर्चा सबसे ऊपर थी और इसमें भी सबसे ज्यादा इस बात की हो रही थी कि श्री नरेन्द्र मोदी यहाँ के प्रवासी भारतीय नागरिकों को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर लोगों में इतना ज्यादा उत्साह था कि आयोजन समिति की वेबसाइट 3-4 बार क्रैश हो गई। सुरक्षा चाक-चौबंद थी, इसलिए अमीरात आईडी के बिना किसी को प्रवेश नहीं दिया जाने वाला था। रजिस्ट्रेशन अनिवार्य था और इतने विशाल कार्यक्रम के लिए सिर्फ एक ही जगह उपयुक्त थी – दुबई अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम। कार्यक्रम भले ही रात 8 बजे होना था, लेकिन लोगों के उत्साह को देखते हुए आयोजन समिति ने दोपहर 2 बजे से ही गेट खोल देने का निर्णय लिया और सभी प्रसार माध्यमों के द्वारा इसकी घोषणा भी करवा दी गई।

सोमवार का दिन था, इसलिए सभी कामकाजी लोगों के लिए आ पाना कठिन था, लेकिन फिर भी श्री नरेन्द्र मोदी के आने की खबर ने यहाँ के सारे भारतीयों के मन में हलचल मचा दी थी। मैंने भी दोपहर में लंच टाइम के बाद दुबई की राह पकड़ ली। मेरे साथ कुछ दोस्त भी थे, जिनके नामों का मैं विशेष रूप से उल्लेख करना चाहता हूँ, शमीर खान, निझहास मोहम्मद, बिपीन जॉन सेरीयक (सभी केरल से) और मधुसूदन राव (हैदराबाद)। सभी लोग कार्यक्रम के प्रति उत्सुक थे। जब हम लोग दुबई स्टेडियम पहुँचे, तब दोपहर के 2:30 बजे थे, लेकिन अभी से प्रवेश के लिए लंबी कतारें लग गई थीं। बाहर तापमान 42ºC और भीषण आद्रर्ता थी। सिल्वर सर्कल का पास होने के कारण हमें ज्यादा समय तक कतार में खड़ा नहीं रहना पड़ा। 5 बजे तक पूरा स्टेडियम भर चुका था। संभवतः आयोजन समिति को भी इतनी बड़ी संख्या में उपस्थिति की उम्मीद नहीं रही होगी। जाति, धर्म और भाषा की सभी सीमाओं को तोड़कर सारे लोग सिर्फ भारतीय के नाते यहाँ मौजूद थे। जिन्हें सुनने आए हैं, वे किस पार्टी के हैं या कौन-सी राजनैतिक विचारधारा के हैं, इस तरह की सारी बातों को अनदेखा करके, सभी भारतीयों के मन में सिर्फ एक ही भावना थी कि जिस देश में हमारा जन्म हुआ है वे उस देश के प्रधानमंत्री हैं और जिस देश में हम अभी रहते हैं, उस देश में वे आए हैं। दुबई के इतिहास का यह एक अभूतपूर्व और असामान्य कार्यक्रम था। 40,000 लोगों की उपस्थिति के बीच चारों ओर से नारे लग रहे थे, ‘वन्दे मातरम’, ‘भारत माता की जय’, और तभी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। हर प्रदेश के कार्यक्रम हो रहे थे। तभी अचानक स्टेडियम में लोक-कलाकार अपनी-अपनी झांकियों के साथ आए। महाराष्ट्र की झांकी आई और भगवा ध्वज को लहराता देख अनजाने ही मेरी आँखें भर आईं, अपनी मातृभूमि की याद ने एक क्षण के लिए मेरी आँखों को भिगो दिया।

दुबई दुनिया के कुछ सबसे महंगे शहरों में से एक है। यहाँ पार्किंग भी मुफ्त नहीं मिलती है। लेकिन दुबई प्रशासन ने न सिर्फ इस कार्यक्रम का पूरा खर्च उठाया, बल्कि बहुत सुंदर आयोजन भी किया। उस दिन मेट्रो स्टेशन से स्टेडियम तक आने-जाने के लिए RTA ने मुफ्त बस सेवा प्रदान की। स्टेडियम में मौजूद सभी लोगों के लिए उनकी सीटों तक मुफ्त पानी पहुँचाने की व्यवस्था की गई थी, साथ ही भीषण गर्मी से परेशानी न हो, इसलिए ग्लूकोज के पैकेट और एनर्जी ड्रिंक की भी पूरी व्यवस्था थी। आयोजन समिति के प्रमुख डॉ. बी. आर. शेट्टी थे। डॉ. बी. आर. शेट्टी प्रसिद्ध UAE Exchange के कर्ता धर्ता हैं, और साथ ही वे UAE की सबसे बड़ी हेल्थ केयर कंपनी के CEO हैं, जिस कंपनी के यहाँ हर शहर में NMC अस्पताल हैं। डॉ. बी. आर. शेट्टी वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने भारत सरकार द्वारा इराक से सकुशल छुड़वाई गई 39 नर्सों को UAE के अपने अस्पतालों में नौकरी दी थी।

मोदीजी के आते ही चारों ओर उत्साह का संचार हो गया। मोदी-मोदी की घोषणाओं से पूरा दुबई गूँज उठा। अपनी मातृभूमि से दूर रह रहे मेरे जैसे सभी लोगों के लिए ये एक बहुत संतुष्टि का पल था कि मेरे देश का प्रधानमंत्री पूरे 34 सालों बाद मेरे पास आया था। सबसे पहले UAE का राष्ट्रगान हुआ और इसके बाद आने वाला अगला क्षण रोमांच से भर देने वाला था। 40,000 लोग एक साथ सामूहिक स्वर में “जन गण मन” गा रहे थे। यह क्षण अद्भुत और रोमांचक था। इसके बाद वह कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसके लिए हम सब वहाँ इकट्ठा हुए थे, अर्थात श्री नरेन्द्र मोदी का भाषण। मोदीजी के भाषण के बारे में मैं यहाँ कुछ नहीं कहूँगा क्योंकि लगभग सभी ने टीवी पर उनका भाषण सुना है। इस कार्यक्रम के संदर्भ में मैं कुछ बातों का विस्तार से उल्लेख करना चाहता हूँ।

  1. हम प्रवासी भारतीय, हमेशा से उपेक्षित एक ऐसा समाज हैं, जिसका भारतीय राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में कोई स्थान नहीं है। हम मतदान नहीं कर सकते और भारत में अचल संपत्ति नहीं खरीद सकते। संक्षेप में, न घर का न घाट का… लेकिन हमारा मन अपनी मातृभूमि को हर पल याद करता है। ऐसी द्विधा मनस्थिति में जब अपने देश से कोई व्यक्ति आता है, तो हम हृदय से उसका स्वागत करते हैं। इसीलिए मोदीजी के स्वागत की हम जी-जान से प्रतीक्षा कर रहे थे।
  2. यहाँ एक दूसरा भारत बसता है। सबसे ज्यादा भारतीय भले ही अमेरिका में रहते हैं, लेकिन वे प्रवासी भारतीय नहीं हैं। वे भारतीय मूल के लोग हैं। यह थोड़ा तकनीकी मामला है। सबसे ज्यादा प्रवासी भारतीय अगर कहीं हैं, तो UAE में हैं। 92 लाख जनसंख्या वाले देश में हम भारतीय 28 लाख हैं। हर सप्ताह भारत से 700 से ज्यादा उड़ानें यहाँ आती हैं। फिर हमारे देश के प्रधानमंत्री को यहाँ आने में 34 साल क्यों लग गए?… इसका उत्तर ऊपर मेरे पहले पॉइंट में है। क्या भारत के किसी राजनेता को अपने ही देश के 28 लाख लोगों की कोई कद्र नहीं थी? और जब हमारी भावनाओं को समझकर मोदीजी यहाँ आए, तो उनका सहर्ष स्वागत होना ही था।
  3. जब से मोदीजी यहाँ आए, यहाँ के राजनेताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। His Highness Crown Prince स्वयं अपने पांचों भाइयों के साथ उनके स्वागत के लिए एयरपोर्ट पहुँचे। यहाँ के शासक मोदीजी को इतना महत्व क्यों दे रहे थे? मोदीजी की आमसभा की तैयारियां यहाँ का प्रशासन क्यों कर रहा था? मेरे ख्याल से इसका उत्तर एक ही है, भारत की छवि अब बदल चुकी है। और इसका श्रेय हमें मोदीजी को देना ही होगा।
  4. श्री नरेंद्र मोदी की His Highness Crown Prince के साथ चर्चा हुई और इसके बाद अबू धाबी में मंदिर निर्माण के लिए जगह मिली। मंदिर निर्माण के लिए जमीन मिलना भारत में बहुत आम बात हो सकती है, लेकिन जो लोग आबूधाबी को जानते हैं और यहाँ के बारे में जानकारी रखते हैं, उन्हें पता ही होगा कि यह कितना बड़ा निर्णय है। अभी तक यहाँ केवल एक मंदिर है, जो दुबई में है।
  5. यहाँ भारतीयों का एक बड़ा वर्ग ‘श्रमिक’ है। और उनकी आय भी बहुत कम होती है। कभी-कभी अनजाने में हो जाने वाले किसी अपराध के कारण लगने वाला जुर्माना भी वे लोग नहीं भर पाते हैं और इसके कारण उन्हें जेलों में सड़ना पड़ता है। भारतीय दूतावास से उन्हें अपेक्षित सहायता नहीं मिल पाती है और अगर मिलती भी है, तो वह केवल कानूनी सहायता होती है। आर्थिक सहायता का कोई प्रावधान नहीं था। लेकिन अब मोदीजी ने यहाँ के दूतावास में एक आकस्मिकता निधि की शुरुआत की है और इस तरह उन्होंने यहाँ के भारतीयों को बहुत बड़ी सहायता दे दी है। इसके लिए उनका धन्यवाद।
  6. भारतीय दूतावास की कार्यशैली भी एक बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा था। यहाँ के दूतावास का कामकाज सरकारी तौर-तरीके से ही चलता था। बेचारा भारतीय प्रवासी आबूधाबी दूतावास के चक्कर लगा-लगाकर थक जाता था। पिछले वर्ष लगभग 4-5 लाख लोगों के पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए पड़े रहे और दूतावास की धीमी गति के कारण यह काम 5 महीनों तक रेंगता रहा, जिस दौरान कई लोग अपनी वार्षिक छुट्टी पर भी नहीं जा सके। लेकिन मोदीजी ने इस मुद्दे पर ध्यान दिया और भारतीय दूतावास को एक माह के भीतर ऑनलाइन व्यवस्था करने के निर्देश दिए, तथा वह वेबसाइट मोबाइल से भी खोली जा सकेगी।
  7. His Highness Crown Prince ने भारत में 475000 करोड़ रूपयों का निवेश करने का निर्णय लिया है, इससे साफ़ है कि भारत के प्रति उनका विश्वास बढ़ा है। और यह विश्वास अब क्यों बढ़ा है? इसका कारण आप लोग स्वयं ढूंढ सकते हैं। इस देश में आकर, यहाँ की भूमि पर खड़े होकर 40,000 भारतीय समाज के सामने आमसभा को संबोधित करने का साहस करना कोई छोटी बात नहीं है।

मैं न तो श्री नरेन्द्र मोदी का समर्थक हूँ और न ही उनका विरोधी हूँ, लेकिन अपने देश का प्रधानमंत्री कैसा होना चाहिए, यह देखकर निश्चित ही गर्व होता है।
‘जय हिंद’

शशांक गिरडकर
==============================================================
(स्त्रोत: https://www.facebook.com/sggiradkar/posts/10206704344360889)

Comments

comments

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.