“स्टार्टअप नेशन” (भाग-१)

इज़राइल
(स्त्रोत: गूगल)

इज़राइल का नाम तो आपमें से हर किसी ने सुना होगा, लेकिन अक्सर इज़राइल की चर्चा अरब देशों से होने वाले झगड़ों, या फिर इज़राइल की कृषि की तकनीकों या आधुनिक सैन्य उपकरणों के संदर्भ में ही होती है। लेकिन इस बात पर कितने लोगों का ध्यान गया होगा कि दुनिया भर में स्टार्ट अप कंपनियों के मामले में भी इज़राइल सबसे आगे है?

केवल ८० लाख जनसंख्या, लगभग शून्य प्राकृतिक संसाधन, और चारों तरफ के दुश्मन देशों से लगातार युद्ध में उलझे हुए इज़राइल में स्टार्टअप कंपनियों की संख्या भारत, जापान, कोरिया, कनाडा और ब्रिटेन से भी अधिक है। अमरीका के नैस्डेक शेयर बाज़ार में कोरिया, जापान सिंगापुर, भारत और पूरे यूरोप की कुल जितनी कंपनियां सूचीबद्ध हैं, उससे ज्यादा अकेले इज़राइल की हैं, जबकि इस देश की जनसंख्या अपने मुंबई या दिल्ली जैसे शहरों से आधी भी नहीं है!

जो देश १९४८ से पहले तक दुनिया के नक्शे में ही कहीं नहीं था, उसने इतनी चुनौतियों और संकटों के बावजूद केवल ७०-७५ वर्षों में इतनी प्रगति कैसे कर ली? इसका जवाब आपको मिलेगा डैन सेनोर और सॉल सिंगर की पुस्तक ‘स्टार्टअप नेशन’ में। तो आइए आज इस किताब की और इसके माध्यम से इज़राइल की बात करें।

१९४८ में संयुक्त राष्ट्र संघ में मतदान के द्वारा इज़राइल नामक एक नया देश विश्व-मानचित्र पर उभरा। उस समय इज़राइल बहुत गरीब देश था, चारों तरफ दुश्मन थे, बार-बार युद्ध का सामना करना पड़ा, खेती के लायक भूमि नहीं थी, सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं था, लेकिन आज इज़राइल कई क्षेत्रों में दुनिया के अधिकांश देशों से आगे है और इसमें तकनीक की बहुत बड़ी भूमिका है। यहां तक कि कृषि के क्षेत्र में भी इज़राइल ने जो प्रगति की है, उसमें ८५% योगदान तकनीक का ही है।

इज़राइल के प्रथम प्रधानमंत्री ने अपने देशवासियों से कहा था कि ‘दुनिया में किस तकनीक के कारण क्या हासिल हुआ, ये बतानेवाले बहुत लोग मिल जाएंगे, लेकिन आगे क्या होने वाला है, और उसमें कौन-सी तकनीक काम आएगी, दुनिया को यह बतानेवाले लोगों की ज़रूरत है। अतीत को देखने के लिए अनुभव काम आता है, लेकिन भविष्य को देखने के लिए दूरदृष्टि होनी चाहिए और इज़राइल को उसी की ज़रूरत है क्योंकि शून्य से काम शुरू करना है’

आज के इज़राइल को देखकर स्पष्ट है कि इस देश ने अकल्पनीय को भी साकार कर दिखाया है, और यह संभव हुआ है कि वहां की सरकार, समाज और सेना के साझा प्रयासों से।

इज़राइल की सरकार इस बात पर विशेष ध्यान देती है कि राष्ट्रीय संसाधनों का एक बड़ा हिस्सा नए शोध और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने में लगाया जाए। जनसंख्या के अनुपात में इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की संख्या के मामले में इज़राइल दुनिया में सबसे आगे है। नई तकनीक का विकास करने या नई तकनीक को सबसे पहले अपनाने के मामले में इज़राइल सबसे आगे है। दुनिया के अन्य देशों की तुलना में इंटरनेट का सबसे ज्यादा उपयोग करने के मामले में भी इज़राइल ही सबसे आगे है।

कई अर्थशास्त्री मानते हैं कि इज़राइल की आर्थिक प्रगति वाकई विश्व के अर्थशास्त्र के इतिहास में अतुलनीय है। इज़राइल के लोग केवल नई तकनीक को सबसे पहले अपनाने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि अक्सर वे पुराने दृष्टिकोण को ही पूरी तरह बदलकर रख देते हैं।

इसका एक उदाहरण आपको इंटेल के कंप्यूटर चिप में मिलेगा। इंटेल कंप्यूटर बनाने वाली प्रसिद्ध कंपनी है।हर कंप्यूटर में एक चिप होता है, जिसका प्रदर्शन इस आधार पर मापा जाता है कि एक सेकंड में चिप कितनी बार ऑन और ऑफ होती है, जिसे क्लॉक स्पीड कहते हैं। क्लॉक स्पीड जितनी अधिक होगी, चिप उतना कार्यक्षम माना जाएगा।

इज़राइल के इंजीनियरों ने एक नए तरह का चिप बनाया और उनका दावा था कि यह चिप इंटेल के वर्तमान चिप से बेहतर और ज्यादा दक्ष है। आप अगर यह सोच रहे हैं कि उन्होंने चिप की क्लॉक स्पीड को बहुत अधिक बढ़ा पाने की कोई तकनीक ढूंढ निकाली होगी, तो आपका अनुमान गलत है। उन्होंने जो चिप बनाया था, उसकी क्लॉक गति इंटेल के चिप की गति से भी धीमी थी और फिर भी उनका दावा था कि यह चिप इंटेल के चिप से बेहतर है!

इन इज़राइली इंजीनियरों ने जब अपने नए चिप का डिज़ाइन पहली बार प्रस्तुत किया, तो इंटेल के मैनेजरों ने उसे खारिज ही कर दिया। वे मानने को तैयार ही नहीं थे कि धीमी गति वाला चिप तेज़ गति वाले चिप से बेहतर हो सकता है।

लेकिन इज़राइली इंजीनियरों ने हार नहीं मानी। उनका तर्क था कि वास्तव में चिप के प्रदर्शन को मापने के लिए क्लॉक स्पीड को आधार बनाने का पैमाना ही गलत है क्योंकि ज्यादा गति पाने के लिए ज्यादा ऊर्जा भी लगती है और इसके कारण ऊष्मा (गर्मी) भी बढ़ जाती है। इसके परिणामस्वरूप कंप्यूटर जल्दी गर्म हो जाता है और उसका प्रदर्शन प्रभावित होता है।

इज़राइल के इंजीनियरों ने चिप की गति को कम करने के अलावा एक बदलाव और किया था। उन्होंने चिप में प्रोसेसिंग के लिए आने वाली जानकारी को भी छोटे-छोटे भागों में बांटने की नई तकनीक विकसित की थी। इसमें कम ऊर्जा की ज़रूरत पड़ती थी, और इस कारण उससे उत्पन्न होने वाली ऊष्मा भी कम हो जाती थी। फलस्वरूप गति बढ़ती थी और बैटरी या ऊर्जा कम लगती थी।

इंटेल को यह समझाने और इस नई ‘मोबिलिटी’ चिप का परीक्षण करने के लिए मनाने में इज़राइली इंजीनियरों को बहुत समय तक प्रयास करना पड़ा। अंततः कई बार के प्रयासों के बाद उन्हें इसमें सफलता मिल ही गई और इंटेल ने उनके इस चिप का उपयोग करने का निर्णय लिया। क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि इसका परिणाम क्या हुआ? इसका परिणाम यह हुआ है कि इंटेल की कुल आय का लगभग आधा हिस्सा इज़राइल के मोबिलिटी चिप डिवीजन की बदौलत आता है! मतलब इंटेल की आधी कमाई इसी चिप के भरोसे हो रही है!

यह तो हुआ इज़राइल के इंजीनियरों की प्रतिभा और प्रयास का एक उदाहरण, लेकिन इज़राइल के आर्थिक विकास में सेना की क्या भूमिका है? इस बारे में लेख के अगले भाग में बात करेंगे।

(इस लेख का अगला भाग आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं)

 

(स्त्रोत: १. स्टार्टअप नेशन पुस्तक)

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