चीन का नया महाद्वीप

पिछले हफ़्ते मैंने “China’s Second Continent” (चीन का दूसरा महाद्वीप) नामक पुस्तक पढ़ी। इसके लेखक एक अमरीकी पत्रकार हॉवर्ड फ़्रेंच हैं। पुस्तक अफ्रीका में चीन द्वारा किए जा रहे निवेश और वहाँ बड़ी संख्या में रहने जा रहे चीनी नागरिकों के बारे में है। पूरे अफ्रीका महाद्वीप के कई देशों में चीन अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है। चीन की मदद से इन देशों में कई सरकारी इमारतें, पुल, स्टेडियम, परिवहन और कृषि व्यवस्था में सुधार आदि कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इन परियोजनाओं में काम करने के लिए लाखों की संख्या में चीनी नागरिक इन अफ्रीकी आगे पढ़ें …

अफ़्रीका में हलचल

कल अपने लेख में मैंने मालदीव के राजनैतिक संकट की बात की थी। आज दक्षिण अफ्रीका की बात करने वाला हूं। इन दिनों वहां भी राजनैतिक हलचल जारी है। लेकिन वहां तक पहुंचने से पहले हमें उत्तर प्रदेश जाना पड़ेगा क्योंकि द.अफ्रीका के कई लोगों की राय है कि उनके देश की वर्तमान सरकार के भ्रष्टाचार के पीछे उप्र के एक परिवार का बड़ा हाथ है। तो आइए आज कुछ नई कड़ियाँ जोड़ने का प्रयास करें। सन १९९३ तक दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद बहुत बड़े पैमाने पर था। कई मामलों में यह केवल सामाजिक ही नहीं था, बल्कि कई मामलों आगे पढ़ें …

हैलो ट्रैक्टर!

आज मैंने अफ्रीकी देश केन्या की एक कंपनी के बारे में खबर पढ़ी। इस कंपनी का नाम हैलो ट्रैक्टर है। जैसे भारत में अक्सर हम लोग कहीं आने-जाने के लिए टैक्सी चाहिए हो, तो ओला या उबर के ऐप से कैब बुलवाते हैं, उसी तरह यह कंपनी केन्या में (और शायद नाइजीरिया में भी) किसानों को खेत जोतने के लिए छोटे ट्रैक्टर किराए पर उपलब्ध करवाती है। मैंने जो लेख पढ़ा, उसके अनुसार इन अफ्रीकी देशों में ट्रैक्टर का औसत मूल्य लगभग ४० हज़ार डॉलर है। इतनी बड़ी रकम जुटाना हर किसान के लिए संभव नहीं है। कुछ मामलों में आगे पढ़ें …