“शिप ऑफ़ फूल्स” (मूर्खों का जहाज)

पिछले कुछ दिनों से मैं यह पुस्तक पढ़ रहा था, जो कि आज पूरी हुई। पुस्तक मुख्यतः अमरीकी राजनीति पर केंद्रित है और अमरीकी वामपंथ के विरुद्ध है। यह ध्यान रखें कि अमरीका में वामपंथ का स्वरूप भारत से बिल्कुल अलग है। लेखक का तर्क है कि अमरीका का पूरा नियंत्रण राजनेताओं और उद्योगपतियों के एक छोटे-से वर्ग के हाथों में आ गया है। ये लोग जनता से पूरी तरह कटे हुए हैं और अमरीका के आम आदमी के मुकाबले इनकी दुनिया पूरी तरह अलग है। उनकी समस्याएं और उनके इरादे भी बिल्कुल अलग हैं। उन्हें आम लोगों से, उनकी आगे पढ़ें …