तस्वीरों के पार

मैं अपनी तस्वीरों में हूँ भी और नहीं भी मैं अपने पोस्टर में हूँ भी और नहीं भी इसमें न कोई विरोध न कोई विरोधाभास. तस्वीर आत्मा जैसी नहीं है वह तो पानी में भीगती है आग में जलती है बह भीगे या जले मुझे कुछ नहीं होता आप मुझे मेरी तस्वीर में या पोस्टर में खोजने का मिथ्या प्रयत्न न करें. मैं तो निश्चिंत बैठा हूँ अपने आत्मविश्वास में- अपनी वाणी, व्यवहार और कर्म में आप मुझे मेरे कर्मों से जानें कर्म ही मेरा जीवन-काव्य है लयताल है. घर में गीतासार आंगन में कर्मधार आप सभी के लिए अकारण आगे पढ़ें …