राष्ट्रवादी मित्रों का कन्फ्यूजन

  वास्तव में अब देश को मोदी और डोभाल की जरूरत नहीं रही। सोशल मीडिया पर ही कई धुरंधर हैं, जो युद्ध नीति, कूटनीति, राजनीति, राष्ट्रनीति, सैन्य संचालन आदि आदि सभी मामलों के जानकार, अनुभवी और विशेषज्ञ हैं। ये वही लोग हैं जो लाहौर में एक हमला होने पर पाकिस्तान से सहानुभूति जताने के लिए अपना प्रोफ़ाइल फोटो काला कर रहे थे, और फिर बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद पाकिस्तान के उकसाने पर भारतीय सेना के समर्थन में भी प्रोफ़ाइल फोटो बदल रहे थे। ये वही लोग हैं, जो आज पकिस्तान को गालियां देते हैं और कल भारत-पाकिस्तान क्रिकेट आगे पढ़ें …

भारत-बांग्लादेश भूमि सीमांकन करार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी बांग्लादेश यात्रा के दौरान कल भारत-बांग्लादेश भूमि सीमांकन करार पर हस्ताक्षर किए। इस करार के तहत भारत और बांग्लादेश के बीच ज़मीन की अदला-बदली की जाएगी। सोशल मीडिया पर कई लोग इस बात से नाराज़ हैं कि भारत ने अपने कुछ गाँव, कुछ ज़मीन बांग्लादेश को दे दी है। लेकिन आखिर यह करार क्या है, इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी और इससे भारत का क्या फायदा या नुकसान होगा? आइये इसके समर्थन या विरोध में कोई राय बनाने से पहले इस मामले के सभी पहलुओं को समझ लें। सन 1947 में भारत विभाजन के बाद रेडक्लिफ आगे पढ़ें …

काश्मीर में भाजपा-पीडीपी का गठबंधन

कुछ भाजपा समर्थक मित्रों की राय है कि मुफ़्ती की हरकतों को देखते हुए भाजपा को तुरंत कश्मीर सरकार से समर्थन वापस ले लेना चाहिए। लेकिन शायद प्रबल भावनाओं के प्रभाव में उन्होंने इस बात पर ध्यान नहीं दिया है कि इससे समस्या हल नहीं होगी बल्कि बढ़ेगी। 1. स्वाभाविक है कि भारत विरोधी विचारधारा वाले लोग नहीं चाहते कि जम्मू-कश्मीर सरकार में ऐसे लोगों का प्रभाव बढ़े, जिनकी निष्ठा भारत के प्रति है। इसलिए सरकार में भाजपा की हिस्सेदारी से कइयों को दर्द हो रहा है। आज जब इस आतंकी की जमानत का विरोध हो रहा है तो विपक्षी आगे पढ़ें …