घुसपैठ…

बांग्लादेश का निर्माण: सन १९४७ में भारत का अंतिम विभाजन हुआ और पाकिस्तान बना। आगे १९७१ में हुए युद्ध के बाद पाकिस्तान के भी दो टुकड़े हुए और बांग्लादेश का निर्माण हुआ। इस बारे में मैंने विस्तार से एक लेख लिखा था, जो आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं। १९७१ के युद्ध और बांग्लादेश के निर्माण का मुख्य कारण यह था कि बांग्लादेश के लोगों को यह महसूस होता था कि पाकिस्तान सरकार भाषा, प्रशासन, राजस्व, प्रतिनिधित्व आदि सभी मामलों में बांग्लादेश के साथ भेदभाव करती है। इसे लेकर लगातार आंदोलन चलते रहते थे और उनके दमन के लिए सेना आगे पढ़ें …

भारत के अदृश्य (प्रथम) नागरिक!

भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने जब श्री रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद के लिए अपना प्रत्याशी घोषित किया, तो बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी ने कथित रूप से पत्रकारों से पूछा था: ये रामनाथ कोविंद कौन है? और ऐसा पूछने वाली वे अकेली नहीं थीं। सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने कहा कि रामनाथ कोविंद को कोई नहीं ‘पहचानता’ और वे कोई ‘बड़े’ नेता नहीं हैं। इसलिए जिन लोगों ने उनका नाम नहीं सुना था, उन्हें लगा कि भाजपा ने केवल वोटबैंक की राजनीति के लिए एक दलित को अपना प्रत्याशी बनाया है और ऐसा करके राष्ट्रपति आगे पढ़ें …

मंत्रिमंडल विस्तार और अनुमान

कल में केंद्रीय मंत्रिमंडल में हुए परिवर्तन के बाद सबसे ज्यादा चर्चा स्मृति ईरानी के बारे में हो रही है। मैं कल से ही देख रहा हूं कि जो लोग मोदी सरकार के विरोधी हैं, वे यह कहकर खुशी जता रहे हैं कि स्मृति ईरानी की ‘छुट्टी’ कर दी गई है या ‘डिमोशन’ हो गया है। दूसरी ओर, जो मोदी सरकार के समर्थक हैं, उनका कहना है कि स्मृति ईरानी ने मानव संसाधन मंत्री के रूप में “जबरदस्त” काम किया था और अब उन्हें उप्र चुनाव में मायावती और प्रियंका गांधी को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए मानव संसाधन मंत्री आगे पढ़ें …

बिहार पर विचार…

कल बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम ने लगभग सभी को चौंका दिया है। चुनाव लड़ने वाला हर कोई जीतने या किसी को हराने के लिए ही लड़ता है (इन दोनों बातों में फर्क है!), इसलिए जो जीते हैं उनकी खुशी और जो हारे हैं उनकी निराशा स्वाभाविक है। लेकिन कल से ही मैं जीतने वालों का अहंकार और हारने वालों का क्रोध दोनों ही देख रहा हूँ। ये दोनों ही ठीक नहीं हैं। जीतने वाले कई लोग ऐसे उपदेश दे रहे हैं, मानो जनता ने उन्हें मनमानी करने का लाइसेंस दे दिया है और हारने वाले कई लोग मतदाताओं को आगे पढ़ें …

मरहबा नमो…

(17 अगस्त 2015 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी यूएई यात्रा के दौरान दुबई में बसे भारतीयों को संबोधित किया। यह ब्लॉग पोस्ट इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में उपस्थित रहे एक प्रवासी भारतीय मित्र श्री शशांक गिरडकर के मूल मराठी लेख का हिन्दी अनुवाद है।) ============================================================== (यह राजनैतिक पोस्ट नहीं है, इसलिए कृपया उस अर्थ में न लें। दुबई क्रिकेट स्टेडियम से एक प्रत्यक्षदर्शी की रिपोर्ट।) ‘मरहबा नमो’ ‘अरबी भाषा में ‘मरहबा का अर्थ है ‘सुस्वागतम’। 17 अगस्त को इसी नाम से एक कार्यक्रम दुबई क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित किया गया था, और मैं स्वयं को भाग्यशाली समझता हूं कि आगे पढ़ें …

भारत-बांग्लादेश भूमि सीमांकन करार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी बांग्लादेश यात्रा के दौरान कल भारत-बांग्लादेश भूमि सीमांकन करार पर हस्ताक्षर किए। इस करार के तहत भारत और बांग्लादेश के बीच ज़मीन की अदला-बदली की जाएगी। सोशल मीडिया पर कई लोग इस बात से नाराज़ हैं कि भारत ने अपने कुछ गाँव, कुछ ज़मीन बांग्लादेश को दे दी है। लेकिन आखिर यह करार क्या है, इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी और इससे भारत का क्या फायदा या नुकसान होगा? आइये इसके समर्थन या विरोध में कोई राय बनाने से पहले इस मामले के सभी पहलुओं को समझ लें। सन 1947 में भारत विभाजन के बाद रेडक्लिफ आगे पढ़ें …

तस्वीरों के पार

मैं अपनी तस्वीरों में हूँ भी और नहीं भी मैं अपने पोस्टर में हूँ भी और नहीं भी इसमें न कोई विरोध न कोई विरोधाभास. तस्वीर आत्मा जैसी नहीं है वह तो पानी में भीगती है आग में जलती है बह भीगे या जले मुझे कुछ नहीं होता आप मुझे मेरी तस्वीर में या पोस्टर में खोजने का मिथ्या प्रयत्न न करें. मैं तो निश्चिंत बैठा हूँ अपने आत्मविश्वास में- अपनी वाणी, व्यवहार और कर्म में आप मुझे मेरे कर्मों से जानें कर्म ही मेरा जीवन-काव्य है लयताल है. घर में गीतासार आंगन में कर्मधार आप सभी के लिए अकारण आगे पढ़ें …