शिमला समझौता

पिछले लेख में मैंने १९४७ में पाकिस्तान के जन्म से लेकर १९७१ में बांग्लादेश के जन्म तक के इतिहास के बारे में संक्षेप में आपको जानकारी दी थी। आज उसके आगे की बात करने वाला हूं। हालांकि कुछ बातों का संदर्भ स्पष्ट करने के लिए बीच-बीच में इतिहास के कुछ अन्य प्रसंगों का भी उल्लेख करूंगा। तो आइये कल की बात को आगे बढ़ाएं। १६ दिसंबर १९७१; केवल १३ दिनों की लड़ाई के बाद ही पाकिस्तान ने घुटने टेक दिए। युद्ध के दौरान वहां का सरकारी मीडिया लोगों को गलत खबर देता रहा कि पाकिस्तान बहुत मज़बूत स्थिति में है आगे पढ़ें …

विजय-दिवस

सन १९४७ में भारत 🇮🇳 का विभाजन हुआ और पाकिस्तान 🇵🇰 जन्मा। तब पाकिस्तान के दो हिस्से थे – एक पश्चिमी पाकिस्तान, जो आज का पाकिस्तान है और दूसरा पूर्वी पाकिस्तान, जो आज का बांग्लादेश है। इस नए राष्ट्र के जन्म के समय पश्चिमी हिस्से की तुलना में पूर्वी पाकिस्तान की जनसंख्या ज्यादा थी। देश की आमदनी में योगदान भी पूर्वी पाकिस्तान का ही ज्यादा था। लेकिन पूर्वी पाकिस्तान के निवासी महसूस करते थे कि उनके योगदान के बदले उन्हें उचित अधिकार और सम्मान नहीं मिल रहा है। बांग्ला भाषा को ऊर्दू जितना महत्व नहीं मिलता था, पूर्वी भाग के आगे पढ़ें …

वन बेल्ट – वन रोड

सन २०१३ में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने “वन बेल्ट वन रोड” (ओबोर) प्रोजेक्ट का विचार प्रस्तुत किया। इसके अंतर्गत चीन से सड़क मार्ग और समुद्री मार्ग द्वारा एशिया, यूरोप और अफ्रीका के अनेक देशों को जोड़ने का प्रस्ताव है। चीन का दावा है कि इससे इन देशों के बीच माल परिवहन की लागत कम होगी, व्यापार बढ़ेगा और सबका लाभ होगा। कई देश इसमें शामिल हुए हैं और कई परियोजनाओं पर काम भी चल रहा है। “चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा” (सीपेक) और पाकिस्तान के ग्वादर में चीन द्वारा बनाया जा रहा बंदरगाह इसी का एक हिस्सा है। चीन का यह आगे पढ़ें …

एक पोर्ट की रिपोर्ट

परसों ३० अक्टूबर को भारत का एक जहाज भारत के कांडला बंदरगाह से सामान लेकर ईरान के चाबहार बंदरगाह की तरफ रवाना हुआ। वहां से इसे ट्रकों से अफगानिस्तान भेजा जाएगा। भारत की ओर से अफगानिस्तान के लोगों की मदद के लिए ११ लाख टन गेहूं भेजा जाने वाला है और ये इसकी पहली खेप है। यह खबर आपने पिछले १-२ दिनों में पढ़ ही ली होगी। इसमें कुछ नया नहीं है और ऊपरी तौर पर इसमें कोई खास बात भी नहीं दिखती। एक से दूसरे देश में व्यापार होना कोई नई बात नहीं है। लेकिन भारत से अफगानिस्तान में आगे पढ़ें …

आपकी कला देश से बड़ी कैसे?

सीमा-पार पड़ोसी देशों से भारत में होने वाली घुसपैठ पिछले कुछ वर्षों से कला के क्षेत्र में भी हो रही है. कभी कोई गायक, कोई संगीतकार, कोई स्टैंड-अप कॉमेडियन, कोई अभिनेत्री और कभी क्रिकेटर इस देश में आ रहे हैं. भले ही पाकिस्तान में भारतीय गायकों-कलाकारों और चैनलों पर रोक लगी हो, लेकिन भारत में पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे शत्रु-देशों से आने वाले कलाकारों का समर्थन करने वालों की कमी नहीं है. इनके समर्थक भारतीय कलाकार अक्सर ये तर्क देते हैं कि “कला की कोई सीमा नहीं होती” या “हम सिर्फ कलाकार हैं, हमें राजनीति से कोई सरोकार नहीं है“. आगे पढ़ें …