तकनीक का दुरुपयोग?

महाराष्ट्र में जालना जिले के एक गाँव में एक गरीब दलित परिवार में जन्मे दिलीप म्हस्के ने अपनी प्राथमिक शिक्षा गाँव के ही स्कूल से पूरी की। उसके आगे की पढ़ाई नवोदय विद्यालय में करने के लिए केन्द्र सरकार से छात्रवृत्ति मिली। बारहवीं तक की पढ़ाई वहीं से पूरी हुई। जालना जिले में अकाल की परिस्थिति के कारण परिवार मुंबई चला आया। म्हस्के महोदय ने वहीं से कानून की डिग्री हासिल की। गरीबी के कारण मजदूरी भी करनी पड़ी। आगे उन्होंने मुंबई आईआईटी से प्लानिंग एंड डेवलपमेंट के विषय में कोई डिग्री ली। उसी दौरान वे सामाजिक और राजनैतिक कार्यों आगे पढ़ें …

भारत के अदृश्य (प्रथम) नागरिक!

भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने जब श्री रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद के लिए अपना प्रत्याशी घोषित किया, तो बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी ने कथित रूप से पत्रकारों से पूछा था: ये रामनाथ कोविंद कौन है? और ऐसा पूछने वाली वे अकेली नहीं थीं। सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने कहा कि रामनाथ कोविंद को कोई नहीं ‘पहचानता’ और वे कोई ‘बड़े’ नेता नहीं हैं। इसलिए जिन लोगों ने उनका नाम नहीं सुना था, उन्हें लगा कि भाजपा ने केवल वोटबैंक की राजनीति के लिए एक दलित को अपना प्रत्याशी बनाया है और ऐसा करके राष्ट्रपति आगे पढ़ें …

मीडिया का एजेंडा?

कल शाम दिल्ली नगर निगम चुनाव के लिए मतदान खत्म हुआ। और सुना है कि उसके कुछ ही समय बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा एक आंदोलन भी समाप्त हो गया। क्या इन दो बातों के बीच कोई संबंध है? क्या वे आंदोलनकारी वाकई किसान थे या तमिलनाडु की किसी जनजाति के संपेरे थे? क्या वे वामपंथी गैंग के सदस्य थे या ग्रीनपीस एनजीओ के कार्यकर्ता थे? क्या ये सही है इंडिया टुडे के कुछ ‘पत्रकार’ (?) उनमें से कुछ लोगों को नोएडा के पास एक गांव के सूखे खेतों में फोटो खिंचवाने के लिए साथ ले गए और आगे पढ़ें …

राष्ट्रवादी मित्रों का कन्फ्यूजन

  वास्तव में अब देश को मोदी और डोभाल की जरूरत नहीं रही। सोशल मीडिया पर ही कई धुरंधर हैं, जो युद्ध नीति, कूटनीति, राजनीति, राष्ट्रनीति, सैन्य संचालन आदि आदि सभी मामलों के जानकार, अनुभवी और विशेषज्ञ हैं। ये वही लोग हैं जो लाहौर में एक हमला होने पर पाकिस्तान से सहानुभूति जताने के लिए अपना प्रोफ़ाइल फोटो काला कर रहे थे, और फिर बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद पाकिस्तान के उकसाने पर भारतीय सेना के समर्थन में भी प्रोफ़ाइल फोटो बदल रहे थे। ये वही लोग हैं, जो आज पकिस्तान को गालियां देते हैं और कल भारत-पाकिस्तान क्रिकेट आगे पढ़ें …

बिहार पर विचार…

कल बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम ने लगभग सभी को चौंका दिया है। चुनाव लड़ने वाला हर कोई जीतने या किसी को हराने के लिए ही लड़ता है (इन दोनों बातों में फर्क है!), इसलिए जो जीते हैं उनकी खुशी और जो हारे हैं उनकी निराशा स्वाभाविक है। लेकिन कल से ही मैं जीतने वालों का अहंकार और हारने वालों का क्रोध दोनों ही देख रहा हूँ। ये दोनों ही ठीक नहीं हैं। जीतने वाले कई लोग ऐसे उपदेश दे रहे हैं, मानो जनता ने उन्हें मनमानी करने का लाइसेंस दे दिया है और हारने वाले कई लोग मतदाताओं को आगे पढ़ें …

सिविल सोसाइटी से कुछ सवाल …

जनलोकपाल बिल को पारित करने की माँग को लेकर अण्णा हज़ारे के नेतृत्व में चल रहे “सिविल सोसाइटी” के आंदोलन की इन दिनों पूरे देश में चर्चा है। क्रिकेट, क्राइम और कॉमेडी की ख़बरों के प्रसारण में व्यस्त रहने वाले तमाम मीडिया चैनल भी अब 24 घंटे केवल इसी आंदोलन को कवर करने में लगे हुए हैं। उन्हें अब न तो क्रिकेट में भारत की जीत-हार की चिंता है, न राखी सावंत के डान्स की और न बिहार या बंगाल में बाढ़ की वीभिषिका की। अब न तो किसी हत्या, बलात्कार या लूटपाट की कोई खबर आ रही है और आगे पढ़ें …