अपनी भाषा और अपनी ज़िम्मेदारी

भाषाओं से मुझे विशेष प्रेम है और अक्सर मैं अपनी भारतीय भाषाओं को अपनाने और आगे बढ़ाने की बात करता हूं। आज फिर इसी विषय को लेकर वापस आया हूं। भाषाओं की बात निकलती है, तो अंग्रेज़ी की बात भी आती है और अंग्रेज़ी के विरोध की बात भी उठती है। मैं अक्सर कहता हूं कि अंग्रेज़ी का नहीं, बल्कि अंग्रेज़ियत का विरोध कीजिए। अंग्रेज़ी अवश्य सीखिए, लेकिन अंग्रेज़ियत के गुलाम मत बनिये। अधिकतर लोग समझ नहीं पाते कि अंग्रेज़ी और अंग्रेज़ियत से मेरा क्या आशय है। मैंने एक बार पहले कहा था कि मैं इस बारे में विस्तार से आगे पढ़ें …

विजय-दिवस

सन १९४७ में भारत 🇮🇳 का विभाजन हुआ और पाकिस्तान 🇵🇰 जन्मा। तब पाकिस्तान के दो हिस्से थे – एक पश्चिमी पाकिस्तान, जो आज का पाकिस्तान है और दूसरा पूर्वी पाकिस्तान, जो आज का बांग्लादेश है। इस नए राष्ट्र के जन्म के समय पश्चिमी हिस्से की तुलना में पूर्वी पाकिस्तान की जनसंख्या ज्यादा थी। देश की आमदनी में योगदान भी पूर्वी पाकिस्तान का ही ज्यादा था। लेकिन पूर्वी पाकिस्तान के निवासी महसूस करते थे कि उनके योगदान के बदले उन्हें उचित अधिकार और सम्मान नहीं मिल रहा है। बांग्ला भाषा को ऊर्दू जितना महत्व नहीं मिलता था, पूर्वी भाग के आगे पढ़ें …

अनुवाद की चुनौतियां

भाषा हमारे जीवन के सर्वाधिक महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। यह मनुष्यों के बीच आपसी संवाद का मूलभूत माध्यम है। भाषा का वैज्ञानिक अध्ययन भाषा-विज्ञान कहलाता है। भाषा के उद्देश्य आंतरिक विचारों व भावनाओं को व्यक्त करना, जटिल व गूढ़ विषयों को समझना, दूसरों के साथ संवाद स्थापित करना, अपनी इच्छाओं व आवश्यकताओं की पूर्ति करना आदि हैं। भाषा के मौखिक, शारीरिक, सांकेतिक आदि कई रूप हैं। एक अनुमान के अनुसार विश्व में लगभग ५ से ७ हज़ार भाषाएं हैं। स्वाभाविक है कि ये सभी भाषाएं सीखना और समझना किसी भी व्यक्ति के लिए असंभव है। लेकिन एक-दूसरे से आगे पढ़ें …

‘हिन्दी-दिवस’

भारत में प्रतिवर्ष १४ सितम्बर का दिन ‘हिन्दी-दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. इस दिन विभिन्न शासकीय-अशासकीय कार्यालयों, शिक्षा संस्थाओं आदि में विविध गोष्ठियों, सम्मेलनों, प्रतियोगिताओं तथा अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. कहीं-कहीं ‘हिन्दी पखवाडा’ तथा ‘राष्ट्रभाषा सप्ताह’ इत्यादि भी मनाये जाते हैं. विश्व की एक प्राचीन, समृद्ध तथा महान भाषा होने के साथ ही हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा भी है. अतः इसके प्रति अपना प्रेम और सम्मान प्रकट करने के लिए ऐसे आयोजन स्वाभाविक ही हैं. परन्तु, दुःख का विषय यह है की समय के साथ-साथ ये आयोजन केवल औपचारिकता मात्र बनते जा रहे हैं. राष्ट्रगीत,राष्ट्रध्वज तथा आगे पढ़ें …