एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर (भाग – १)

हैदराबाद के संजय बारू ने कई सालों तक पत्रकारिता के क्षेत्र में काम किया। इस दौरान कई सालों तक वे ‘द बिज़नेस स्टैंडर्ड’, ‘इकोनॉमिक टाइम्स’ और ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ जैसे अखबारों और पत्रिकाओं में रहे। इनमें से कोई भी अखबार नरेन्द्र मोदी या भाजपा का समर्थक नहीं है। इंदिरा गांधी के प्रेस सचिव, और उनके भाषण लिखने वाले, एच. वाय. शारदा प्रसाद और उनके परिवार से संजय बारू की पत्नी के पारिवारिक संबंध थे। जिस समय मनमोहन सिंह भारत के वित्त सचिव थे, उस दौरान बारू के पिता भी उनकी टीम में काम करते थे। इनमें से भी कोई भाजपा आगे पढ़ें …

वीर सावरकर को सादर नमन

जिन सावरकर जी की लिखी पंक्तियाँ अंदमान जेल से पिछली सरकार ने उखाड़कर फेंक दी थीं, उसी अंदमान जेल में जाकर देश का प्रधानमंत्री सावरकर जी की स्मृति में शीश झुकाता है, ये भी मेरे लिए अच्छे दिन हैं। नकारात्मक विचारों वाले लोग इस बात का हिसाब लगाने और शिकायती स्वर में रोते रहने के लिए स्वतंत्र हैं कि इस सरकार ने क्या-क्या काम नहीं किए। मैं हर मामले में सकारात्मक पहलू को देखने वाला व्यक्ति हूँ और मेरा ध्यान इसी बात पर रहता है कि कहाँ क्या अच्छा हो रहा है। पिछली सरकार से भी मेरी नाराज़गी इस बात आगे पढ़ें …

सोशल मीडिया का राजनैतिक हिंदुत्व

जितने लोग सुबह-शाम भाजपा पर हिंदुत्व से हटकर विकास की ओर भटक जाने का इल्ज़ाम लगाते रहते हैं, उनमें से कितनों ने वाकई पिछले कुछ चुनावों के भाजपा के घोषणा पत्र पढ़े हैं? अगर पढ़े हैं, तो बताएं कि उसमें राम मंदिर या हिंदुत्व पर कितने प्रतिशत फोकस था और विकास पर कितने प्रतिशत था? भाजपा का एजेंडा क्या है, उससे ज्यादा बड़ी समस्या आजकल ये है कि सोशल मीडिया के ज्ञानियों का निजी एजेंडा क्या है। कुछ लोग बिना पढ़े कुछ भी ऊलजलूल लिखकर बाकियों को बहका रहे हैं और कुछ लोग अपने निजी कारणों से जानबूझकर दूसरों को आगे पढ़ें …