संगीत की भाषा

भारत की लोकगीत-लोकसंगीत की परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। कुछ वर्षों पहले तक यह आशंका होती थी कि ये सब कलाएं, परंपराएं और संगीत कहीं अंग्रेज़ी पॉप कल्चर और बॉलीवुड की आंधी में उड़कर लुप्त न हो जाएं। लेकिन अब डिजिटल युग में ये चिंता दूर हो गई है। क्षेत्रीय भाषाओं-बोलियों के पारंपरिक गीत भी अब म्यूजिक अल्बम और वीडियो रिकॉर्डिंग के रूप में जाने-अनजाने में ही सुरक्षित-संरक्षित हो रहे हैं। करीब १०-१२ वर्षों पहले अपने कॉलेज के दिनों में जब मैं बालाघाट में रहता था, तो नवरात्रि के दौरान हर गली, हर पंडाल में शहनाज़ अख्तर के देवी-गीतों के आगे पढ़ें …