झरना…

अब खुश और संतुष्ट लोग बहुत कम मिलते हैं. हम किसी से भी बात करें – वह शिकायतों का पिटारा खोल देता है. ‘मेरे पास समय ही नहीं रहता, मेरे पास पैसे नहीं हैं, दुनिया की इस दौड़ में मैं कैसे टिकूंगा, ओह, आज तो बारिश हो रही है, आज मेरा मूड नहीं है!’ ये सब अपनी खुशी को ‘टालने’ के बहाने हैं. कुछ काम ऐसे हैं, जिनसे हमें ही खुशी मिलेगी – लेकिन हम ही उन बातों की खुशी गंवा रहे हैं! क्या यह अजीब नहीं लगता? किसी फूल की खुशबू का मज़ा लेने में कितना समय चाहिए? उगते-डूबते आगे पढ़ें …