यूरोप से भारत का समुद्री मार्ग

राजनीति के अलावा इतिहास भी मेरा पसंदीदा विषय है। इन दिनों मैं पुर्तगालियों के बारे में एक पुस्तक पढ़ रहा हूँ, जो इतिहास के लगभग ६०० साल पुराने कालखंड के बारे में है। ये वो दौर था, जब यूरोप के देशों में आपसी होड़ मची हुई थी कि भारत तक पहुँचने का समुद्री मार्ग ढूँढना है। कोलंबस भी भारत ही ढूँढने निकला था लेकिन वह वेस्ट इंडीज़ जा पहुँचा। समुद्री मार्ग से भारत तक पहुँचने वाला पहला यूरोपीय नाविक वास्को डी गामा था, जो १४९८ में कालीकट आया था। उसके पहले भी कई दशकों तक पुर्तगाली यह मार्ग ढूँढने का आगे पढ़ें …

कॉमनवेल्थ: गुलामी की निशानी

सोलहवीं शताब्दी से ब्रिटेन ने दुनिया भर के देशों पर कब्जा करना और उन्हें गुलाम बनाना शुरू किया। इन देशों को ब्रिटिश कॉलोनियां या उपनिवेश कहा गया। इन देशों का शासन पूरी तरह ब्रिटिश सरकार के अधीन था। भारत भी इनमें से एक था। उन्नीसवीं शताब्दी में इन देशों को स्वतंत्रता या स्वायत्तता मिलना शुरू हुई। सन १८६७ में कनाडा को डोमिनियन का दर्जा मिला। इसका मतलब ये था कि अब कनाडा का शासन ब्रिटिश सरकार नहीं, बल्कि कनाडा के लोग ही चलाएंगे। लेकिन, कनाडा पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हुआ था। डोमिनियन होने का मतलब था कि अभी भी ब्रिटेन आगे पढ़ें …

शिमला समझौता

पिछले लेख में मैंने १९४७ में पाकिस्तान के जन्म से लेकर १९७१ में बांग्लादेश के जन्म तक के इतिहास के बारे में संक्षेप में आपको जानकारी दी थी। आज उसके आगे की बात करने वाला हूं। हालांकि कुछ बातों का संदर्भ स्पष्ट करने के लिए बीच-बीच में इतिहास के कुछ अन्य प्रसंगों का भी उल्लेख करूंगा। तो आइये कल की बात को आगे बढ़ाएं। १६ दिसंबर १९७१; केवल १३ दिनों की लड़ाई के बाद ही पाकिस्तान ने घुटने टेक दिए। युद्ध के दौरान वहां का सरकारी मीडिया लोगों को गलत खबर देता रहा कि पाकिस्तान बहुत मज़बूत स्थिति में है आगे पढ़ें …