अमरीका में पहला सप्ताह (अमरीकी डायरी-२)

इस श्रृंखला के पहले भाग में आपने सिंगापुर से निकलकर अमरीका पहुंचने तक की यात्रा के बारे में पढ़ा (पहला भाग यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं)। अब इस भाग में मैं आपको उसके आगे की कहानी बताने वाला हूं।

७ जुलाई की रात अरुणजी ने हमें सैन फ्रांसिस्को हवाई अड्डे से पालो आल्टो में हमारे होटल तक पहुंचाया। मेरे इस वृतांत में आप पालो आल्टो, सनीवेल, मेनलो पार्क, रेडवुड सिटी, फ्रीमोंट, सैन होज़े, सैन फ्रांसिस्को, बे-एरिया, कैलिफोर्निया, डाउनटाउन आदि कई नाम अक्सर पढ़ेंगे। इनके बारे में आपको संक्षेप में बता देता हूं।

अमरीका में कैलिफोर्निया की स्थिति (लाल रंग में)

अमरीका में कुल ५० राज्य हैं, जिनमें से कैलिफोर्निया भी एक है। यह अमरीका के पश्चिमी तट पर स्थित है। इसके उत्तर में ओरेगॉन राज्य और दक्षिण में मेक्सिको नामक देश है। सैन फ्रांसिस्को, सैन होज़े, लॉस एंजेलिस और सैन डिएगो इसके मुख्य शहरों में से हैं। यहां का फ़िल्म उद्योग, जो हॉलीवुड कहलाता है, वह लॉस एंजेलिस में ही है। नीचे सैन डिएगो के पास ही मेक्सिको की सीमा है। पिछले वर्ष अपनी पहली अमरीका यात्रा के दौरान मैं लॉस एंजेलिस, सैन डिएगो और मेक्सिको की सीमा तक भी गया था, जिसके कुछ फोटो आपने मेरे पुराने Facebook एल्बम में देखे होंगे।

सैन फ्रांसिस्को से सैन होज़े तक का इलाका सैन फ्रांसिस्को बे-एरिया (सैन फ्रांसिस्को खाड़ी क्षेत्र) कहलाता है। स्थानीय बोलचाल में इसके लिए बे-एरिया ही प्रचलित नाम है। प्रसिद्ध सिलिकॉन वैली का इलाका इसी क्षेत्र में है, जहां Facebook, गूगल, ट्विटर, लिंक्डइन, ईबे, एचपीआदि सहित कई प्रसिद्ध कंपनियों के मुख्यालय या कार्यालय हैं। पालो आल्टो, माउंटन व्यू, सनीवेल, फॉस्टर सिटी, मेनलो पार्क, सनीवेल, फ्रीमोंट आदि कई छोटे-छोटे कस्बे इस इलाके में फैले हुए हैं। यहां जनसंख्या कम और ज़मीन बहुत ज्यादा होने के कारण ज्यादातर इमारतें छोटी-छोटी ही होती हैं। ऊंची इमारतें केवल सैन फ्रांसिस्को जैसे महानगरों में ही देखने को मिलती हैं। बे-एरिया के छोटे शहरों में अधिकांश घर, मॉल, कार्यालय, दुकानें आदि केवल एक या दो मंज़िला ही होती हैं। कहीं-कहीं ३-४ मंज़िलों वाली इमारतें हैं, लेकिन उनकी संख्या तुलना में बहुत कम ही है।

कैलिफोर्निया में सैन फ्रांसिस्को खाड़ी क्षेत्र

७ जुलाई की रात अमरीका पहुंचने के बाद अगले ५ दिनों तक हमारा ठिकाना पालो आल्टो के होटल कीन में था। मैंने हमेशा की अपनी आदत के अनुसार यहां आने से पहले ही होटल ऑनलाइन बुक करवा लिया था, ताकि कोई दिक्कत न हो। मैं यहां पिछली बार भी ठहरा था, इसलिए मुझे मालूम था कि ये होटल छोटा-सा है, लेकिन इसकी लोकेशन बहुत अच्छी है क्योंकि यह डाउनटाउन में है। अमरीका में डाउनटाउन का अर्थ होता है, शहर का मुख्य इलाका, जहां बाज़ार, पोस्ट ऑफिस और अधिकतर कार्यालय आदि होते हैं और सबसे ज्यादा चहल-पहल भी रहती है। इसीलिए मैंने यह होटल चुना था क्योंकि यहां थोड़ी चहल-फल रहती है और पास ही दो भारतीय रेस्तरां हैं, कुछ ही दूरी पर बस स्टैंड, रेल्वे स्टेशन व हमारे ऑफिस की शटल (बस) का स्टॉप भी है। इसलिए हर लिहाज से यह होटल हमारे लिए सुविधाजनक था।

लेकिन फिर भी ये शुरुआती दिन हमारे लिए बहुत चुनौतीपूर्ण थे। एक तो हमारे पास बड़े-बड़े ६-७ बैग थे, जिसके कारण कमरे का बहुत-सा हिस्सा हमारे सामान से ही भर गया था, इसलिए मेरे दो वर्ष के बेटे के पास खेलने के लिए बहुत कम जगह बची थी। दूसरा, शुरुआती दिनों में जेट लैग का प्रभाव भी रहता है, इसलिए भी मेरे परिवार को दिक्कत हो रही थी। लगभग एक हफ्ते तक मेरा बेटे की दिनचर्या सिंगापुर के समय के अनुसार ही चलती रही, इसलिए वह दिन में ज़्यादातर समय सोता रहता था क्योंकि तब सिंगापुर में रात होती है और वह लगभग पूरी रात खेलता रहता था क्योंकि तब सिंगापुर में दिन का समय रहता है। मेरी पत्नी को भी उसी के अनुसार अपनी दिनचर्या रखनी पड़ती थी। मेरे लिए दोहरी चुनौती थी क्योंकि मैं दिन में ऑफिस में तो सो नहीं सकता था और रात में होटल में भी ठीक से सो नहीं पाता था। इसलिए उन दिनों मैं रोज़ केवल २-३ घंटों की नींद से ही काम चलाता रहा।

अगले दिन सुबह अरुण जी फिर पालो आल्टो आए और हमें अपने साथ फॉस्टर सिटी में उनके घर ले गए। पिछली बार जब मार्च में मैं अमरीका आया था, तब भी फॉस्टर सिटी में उनके घर गया था और एचएसएस की शाखा में भी गया था। उस समय यहां के १०-१२ भारतीय परिवारों से मुलाकात हुई थी। उनमें से कुछ का घर तो अरुणजी वाली इमारत में ही है, इसलिए पिछली बार उन लोगों के यहां नाश्ते-भोजन आदि के लिए भी मैं आमंत्रित था। इस बार भी अरुणजी के यहां भोजन हुआ और उनके परिवार के अलावा आसपास के परिवारों के लोगों से मेरे परिवार का भी परिचय हो गया।

इनमें से अधिकांश लोग भारत के आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से यहां आए थे और पिछले लगभग ९-१० वर्षों से यहीं रहते हैं। लेकिन मुझे इस बात से बहुत खुशी हुई कि ये सभी लोग आपस में हिन्दी बोलते हैं। अरुणजी ने तो मुझे बताया कि हिन्दी उन्होंने यहीं आकर सीखी है। मेरे लिए ये बहुत खुशी की बात थी।

शनिवार का दिन इन लोगों के घर में बिताने के बाद शाम को हम पालो आल्टो लौटे और फिर बस से माउंटन व्यू में वॉलमार्ट के स्टोर में गए। बे-एरिया के पूरे इलाके में सार्वजनिक परिवहन की सुविधाएं बहुत सीमित हैं और रेलों-बसों आदि की संख्या भी बहुत कम है। इसलिए यहां कार के बिना काम नहीं चल सकता। लेकिन अब उबर जैसी कंपनियों के कारण टैक्सी भी आसानी से मिल जाती है। फिर भी यहां कार रखना टैक्सी की तुलना में बहुत सस्ता पड़ता है। लेकिन फिलहाल तो कुछ दिनों तक हमें बसों और उबर से ही काम चलाना था। सौभाग्य से हमारा होटल और वॉलमार्ट का स्टोर दोनों ही बस स्टॉप के पास हैं, इसलिए हमें दिक्कत कम हुई। मैं पहले भी अक्सर इसी इलाके में ठहरता था, इसलिए वॉलमार्ट का यह स्टोर भी मुझे अच्छी तरह मालूम था।

VTA की साधारण बस

इस इलाके में दो तरह की बसें चलती हैं। एक तो साधारण बसें, जो हर स्टॉप पर रुकती हैं। इनका रंग सफेद होता है और इनका किराया २ डॉलर तय है। आपको कहीं भी जाना हो, तो २ ही डॉलर किराया लगता है। दूसरी नीले रंग की रैपिड बसे हैं, जिनमें एसी और वाईफाई की सुविधा भी रहती है। इन बसों का किराया ४ डॉलर तय है, लेकिन ये हर स्टॉप पर नहीं रुकतीं, इसलिए तेज़ जाती हैं। सभी बसों में आगे की तरफ कैरियर भी लगा होता है, जिसमें यात्री अपनी साइकल लटका सकते हैं। बसों में किराए का भुगतान करने के लिए ड्राइवर के पास एक मशीन रखी होती है। उसमें एक-एक करके नोट या सिक्के डालने पड़ते हैं और स्क्रीन पर राशि दिखाई देती है। ध्यान रखने की बात ये है कि आपने अगर ज्यादा पैसे डाले, तो वो वापस नहीं मिलेंगे। जब मैं पहली बार अमरीका आया था, तब मेरे पास क्रेडिट कार्ड न होने कारण मैं उबर की टैक्सी नहीं ले पाता था और बस या ट्रेन से ही जाना पड़ता था। ऐसे में कभी-कभी एक-एक डॉलर के नोट या सिक्के न होने पर मुझे मजबूरी में ५ डॉलर का नोट डाल देना पड़ता था। इस तरह तब मैंने १-२ बार नुकसान उठाया था। लेकिन अनुभव सब सिखा देता है, इसलिए इस बार पर्याप्त संख्या में छोटे नोट और सिक्के हमारे पास थे। दूसरा कारण ये भी है कि पिछली ४ यात्राओं के दौरान भी हर बार जो चिल्लर बचती थी, वो सब मैंने अपने पास जमा करके रख ली थी, जो अब काम आ रही है।

वॉलमार्ट से हम कुछ ज़रूरी सामान लेकर पालो आल्टो लौटे और फिर होटल के पास वाले भारतीय रेस्तरां में ही भोजन किया। अगले दिन रविवार के कारण छुट्टी थी, तो वो पूरा दिन मैंने होटल में ही आराम करते हुए बिताया। सुबह के नाश्ते की व्यवस्था होटल में ही थी और दोपहर का भोजन मैंने उबर की ही डिलीवरी सेवा उबर इट्स के माध्यम से एक भारतीय रेस्तरां से मंगवा लिया था। मज़ेदार बात ये हुई कि शाम को जब हम टहलने निकले, तब हमें पता चला कि दोपहर को जिस रेस्तरां से लंच मंगवाया था, वह तो हमारे होटल से बिल्कुल पास में अगले चौराहे पर ही था!

सोमवार से मेरा ऑफिस का नियमित कामकाज शुरू हुआ। चूंकि मैं यहां पिछले एक साल से आ रहा हूं, इसलिए मेरे लिए इसमें कोई नई बात नहीं है और न बताने लायक कुछ नया है। बे-एरिया के विभिन्न इलाकों से कर्मचारियों को लाने ले जाने के लिए विभिन्न कंपनियां अपनी बसें चलाती हैं, जिन्हें इस इलाके में शटल कहा जाता है। हमारे ऑफिस की शटल का स्टॉप भी होटल के पास ही रेलवे स्टेशन के बाहर है, इसलिए मुझे आने-जाने में कोई असुविधा नहीं थी।

वैसे सनीवेल के एक अपार्टमेंट में एक महीने तक हमारे रहने की व्यवस्था हो गई थी, लेकिन वह अपार्टमेंट १२ जुलाई से उपलब्ध होने वाला था, इसलिए तब तक के ५ दिनों के लिए हमें होटल में ठहरना पड़ा।

भारत में आमतौर पर हम जिसे फ्लैट कहते हैं, वह यहां अपार्टमेंट कहलाता है। यहां ऐसे कई अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स भी होते हैं, जिनका संचालन कोई कंपनी करती है। वह कंपनी ही इन अपार्टमेंट्स की मालिक होती है और यहां की सुरक्षा, रखरखाव आदि की ज़िम्मेदारी भी उसी की होती है। लोग केवल किराया देते हैं और होटलों की तरह ही इन अपार्टमेंट्स में रहते हैं। इस तरह के अपार्टमेंट्स सामान्यतः फर्निश्ड होते हैं, जिसका मतलब ये है कि टीवी, फर्नीचर, सोफा, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, किचन के बर्तन, माइक्रोवेव आदि सब-कुछ ये कंपनियां ही उपलब्ध करवाती हैं। यहां वॉशिंग मशीन को वॉशर एंड ड्रायर कहा जाता है और आमतौर पर इसमें एक के ऊपर बनी दो मशीनें होती हैं। इनमें से एक में कपड़े धुलते हैं और फिर निकालकर दूसरे में सुखाए जाते हैं। भारत या सिंगापुर के समान सामान्यतः लोग यहां कपड़े घरों के बाहर नहीं सुखाते। कई जगह वॉशिंग मशीनें हर अपार्टमेंट में नहीं होती, बल्कि कॉम्प्लेक्स में ही एक कॉमन वॉशिंग एरिया होता है, जहां बहुत सारी मशीनें लगी रहती हैं। लोग अपने कपड़े वहीं लाकर धोते हैं और उन मशीनों का उपयोग करने का किराया कार्ड से चुकाते हैं।

इन अपार्टमेंट्स की कुछ और बातें भी भारत से अलग हैं, इसलिए मैं उनके बारे में बताना चाहता हूं। भारत के विपरीत यहां मुझे अपार्टमेंट बुक करने या एग्रीमेंट साइन करने आदि के लिए किसी से मिलने या बात करने नहीं जाना पड़ा। सारा काम ईमेल के माध्यम से हुआ। मैंने ईमेल द्वारा एग्रीमेंट साइन करके भेजा और मेरे अपार्टमेंट की जानकारी, मेरे लिए आरक्षित पार्किंग स्लॉट का नंबर, अपार्टमेंट के वाईफाई का पासवर्ड आदि सब-कुछ मुझे ईमेल पर ही मिल गया। यहां तक कि अपार्टमेंट की चाबी कहां मिलेगी, उसके निर्देश भी ईमेल से ही आए। जिसे भारत में हम कॉलोनी या सोसायटी कहते हैं, उसे यहां हम कम्युनिटी या अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स कह सकते हैं। तो इस अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में घुसने के लिए एक गेट से होकर आना पड़ता है। लेकिन भारत के समान यहां गेट खोलने बंद करने के लिए कोई गार्ड या चौकीदार नहीं है। गेट के बाहर एक मशीन लगी है, जिसमें सही कोड डालने पर गेट खुल जाता है और फिर कुछ समय बाद अपने आप बंद हो जाता है। यह खुल जा सिमसिम वाली कहानी जैसा है। अगर आप कोड भूल गए, तो गेट नहीं खोल पाएंगे।

पालो आल्टो के अपने होटल से सनीवेल के इस अपार्टमेंट तक आने के लिए हमने उबर की कैब बुक करवाई और सारा सामान लादकर यहां आ पहुंचे। गेट के बाहर पहुंचने पर मैंने कोड डालकर इस सिमसिम को खोला और गाड़ी हमें अपार्टमेंट तक पहुंचाकर चली गई। उबर का एक लाभ ये है कि इसकी सुविधा कई देशों में उपलब्ध है और हर जगह भुगतान मेरे क्रेडिट कार्ड से हो जाता है, इसलिए नकदी और चिल्लर की चिंता नहीं करनी पड़ती।

कैब से हम अपार्टमेंट तक पहुंच तो गए, लेकिन अंदर कैसे जाएंगे? इसके लिए भी हमें अपार्टमेंट की चाबी लेने कहीं नहीं जाना था। अपार्टमेंट के दरवाजे पर ही एक नंबर वाला ताला लटका हुआ था। उसका कोड भी मुझे ईमेल द्वारा पहले ही मिल चुका था। सही कोड डालने पर वह ताला खुल गया और उसके खांचे में रखी हमारे अपार्टमेंट की चाबी बाहर आ गई। उस चाबी से दरवाजा खोलकर हम अपने अपार्टमेंट में पहुंच गए। अंदर टेबल पर एक लिफाफे में डुप्लीकेट चाबी और नीचे के हमारे लेटर बॉक्स की चाबियां आदि रखी हुई मिल गई। अब अगले एक महीने तक यही अपार्टमेंट हमारा घर है।

अगले भाग में आपको अमरीका का अगला अनुभव बताऊँगा।

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