अमरीका में पेट्रोल (अमरीकी डायरी – ३)

भारत में अपनी कार में पेट्रोल तो मैंने कई बार डलवाया है, लेकिन अपने हाथ में पाइप पकड़कर पेट्रोल भरने की नौबत कभी नहीं आई थी। आज वो काम भी करना पड़ा क्योंकि यहां ज्यादातर पेट्रोल पंप ऐसे ही होते हैं। कोई कर्मचारी नहीं होता, आपको खुद ही मशीन में अपना क्रेडिट/डेबिट कार्ड डालकर भुगतान करना पड़ता है और पाइप उठाकर खुद ही पेट्रोल भरना पड़ता है। चूंकि इस काम में मैं अनाड़ी था, इसलिए थोड़ी दिक्कत भी हुई।

किराए की कार थी, इसलिए पहले तो यह याद नहीं रहा कि उसकी पेट्रोल की टंकी का ढक्कन दाईं तरफ है या बाईं तरफ है। मैंने पेट्रोल पंप पर जाकर गाड़ी खड़ी की और ढक्कन खोलने के लिए नीचे उतरा तब पता चला कि मैंने गाड़ी उल्टी तरफ लगा दी है। ढक्कन दाईं तरफ खुलता था और पंप बाईं तरफ था। फिर गाड़ी आगे ले जाकर दूसरी तरफ से वापस लानी पड़ी।

सोचा था कि अब काम हो जाएगा। इसलिए नीचे उतरा और मशीन में अपना क्रेडिट कार्ड लगाया, लेकिन कार्ड स्वीकृत नहीं हुआ। फिर दूसरे कार्ड से कोशिश की, वो भी नहीं चला। स्क्रीन पर अंग्रेजी में मैसेज आता था कि कैशियर से जाकर मिलो। यहां मैंने देखा है कि पेट्रोल पंप के परिसर में ही एक छोटी दुकान भी होती है, जहां खाने-पीने की कुछ चीजें और ऐसा ही दूसरा छोटा-मोटा सामान मिल जाता है। तो मैं वहां गया और काउंटर पर बैठे व्यक्ति से कहा कि मेरा कार्ड नहीं चल रहा है। वो शायद भारतीय या पाकिस्तानी था। उसने बहुत रूखे ढंग से जवाब दिया कि हमारी मशीनों पर क्रेडिट कार्ड नहीं चलता। डेबिट कार्ड लगाओ। अब मेरी जेब में उस समय कोई डेबिट कार्ड नहीं था। इसलिए मैं निराश हुआ कि अब दूसरा पंप ढूंढना पड़ेगा। यही सोचता हुआ मैं कार तक वापस पहुंचा और फिर मेरा बल्ब जला कि एक विकल्प और है।

इसलिए मैं वापस कैशियर के पास गया और उससे पूछा कि क्या मैं नकद देकर पेट्रोल भरवा सकता हूं। गनीमत है कि वो नकदी लेता था। पर अब दूसरी चुनौती आई। उसने पूछा कि मुझे कितने डॉलर का पेट्रोल चाहिए? अब मैं फिर फंस गया क्योंकि मुझे पता ही नहीं था कि यहां पेट्रोल का रेट क्या है और मुझे कितना पेट्रोल भरवाना चाहिए। मैंने बिना सोचे-समझे २० डॉलर बोल दिया। बाद में विचार आया कि इतना भरवा लूं, तो अंदाज़ा हो जाएगा कि टंकी कितनी भर गई, उसके बाद तय कर सकूंगा कि और भरवाना है या इतना काफी है। फिर उसको २० डॉलर दिए और वो गर्दन झुकाकर अपने काम में लग गया। फिर मैंने उसको टोका और रसीद मांगी।

अब वापस कार के पास पहुंचा। टंकी का ढक्कन खोलने तक तो कोई दिक्कत नहीं थी, पर पाइप लगाकर भरना एक चुनौती थी। जीवन में कभी ये काम किया नहीं, इसलिए पता नहीं था कि कौन-सा क्लच दबाना है या क्या मशीन पर भी कोई बटन-वटन दबाना पड़ता है? ये भी नहीं पता था कि बीस डॉलर में कितना पेट्रोल आता है और कहीं उतने का पेट्रोल भरने से पहले ही टंकी भर गई तो क्या करूंगा।

अमरीका में माप की सारी इकाइयां भी अलग हैं, इसलिए वो भी एक बड़ा कन्फ्यूजन है। अपना लीटर, किलोमीटर, सेल्सियस, किलोग्राम आदि कुछ भी यहां नहीं चलता। इनका सारा मामला गैलन, मील, फारेनहाइट और पाउंड में चलता है। वो एक अलग सिरदर्द है, उसका गुणगान आपको फिर कभी सुनाऊंगा।

खैर अभी तो पेट्रोल भरना है। तो मैंने टंकी खोली, पाइप लगाया और क्लच दबा दिया। सौभाग्य से इतना ही काम करना था, इसलिए अब कोई दिक्कत नहीं हुई। मैं मशीन के डिस्प्ले पर बढ़ते अंकों को देखता रहा। पेट्रोल की कीमत २.७९९ डॉलर/गैलन थी। २० डॉलर में कुल ७.१४५ गैलन पेट्रोल मिला। अभी आपके लिए मैंने गूगल देखा, तो पता चला है कि १२८३ रुपये में लगभग २७ लीटर पेट्रोल मिला है, मतलब एक लीटर की कीमत लगभग ४७ ₹ है। (मोदी के विरोधी चाहें तो अब इस बात के लिए इस्तीफा मांग सकते हैं कि भारत में पेट्रोल ज़्यादा महंगा क्यों है! 

२० डॉलर पर पहुंचने के बाद मशीन ने पेट्रोल भरना बन्द कर दिया। मैंने पाइप वापस लगाया, टंकी बंद की और कार में वापस बैठने के बाद डैशबोर्ड चेक किया। २० डॉलर में टंकी आधी भर गई थी। तब लगा कि मैंने ठीक ही भरवाया है, न बहुत कम, न बहुत ज़्यादा।

इस तरह कुछ शुरुआती गड़बड़ियों और चुनौतियों से उलझने-सुलझने के बाद पेट्रोल भरवाने का काम सफलतापूर्वक पूरा हुआ। बहुत छोटा ही सही, लेकिन मेरे लिए ये एक नया अनुभव था और मैंने इससे भी बहुत-कुछ नया सीख लिया। पहली बार था, इसलिए दिक्कत हुई, लेकिन मैं अच्छा विद्यार्थी हूं और अक्सर जो चीज एक बार ध्यान से सीख लेता हूं, वो जीवन भर मुझे याद रहती है। इसलिए अब आशा है कि अगली बार जब कभी पेट्रोल भरवाने जाऊंगा, तो कोई दिक्कत नहीं होगी। 

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