अमरीकी ड्राइविंग लाइसेंस (अमरीकी डायरी – ६)

मुझे कल अमरीका का ड्राइविंग लाइसेंस मिल गया। आज अमरीकी डायरी के इस लेख में मैं वही अनुभव आपके लिए प्रस्तुत कर रहा हूं।

हम अमरीका के जिस इलाके में रहते हैं, वहां सार्वजनिक परिवहन की सुविधाएं लगभग शून्य हैं। इसलिए कार के बिना दैनिक जीवन के कई सामान्य काम कर पाना भी कठिन हो जाता है। कार यहां मजबूरी है, ज़रूरत है, विलासिता या शान का प्रतीक नहीं है।

मैं भी जब जुलाई में यहां आया था, उसी समय से मैंने यहां का ड्राइविंग लाइसेंस पाने की प्रक्रिया की जानकारी भी जुटानी शुरू कर दी थी। वह कल जाकर पूरी हुई।

भारत में लाइसेंस कैसे बनते हैं, और कैसे बनवाए जाते हैं इस बारे में आपको अच्छी तरह पता ही होगा। मैं ऐसे कई लोगों को जानता हूं, जिनके पास कार चलाने का लाइसेंस है, जबकि उन्होंने कभी स्टीयरिंग व्हील को छुआ भी नहीं है। हम सड़क दुर्घटनाओं के लिए अक्सर गड्ढों और सड़कों की बुरी हालत को दोष देते हैं, लेकिन वास्तव में सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण हमारी लापरवाही ही है। खैर, उसके बारे में अगली बार बात करेंगे। आज का विषय सिर्फ लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया तक ही सीमित है।

भारत में एक ही ड्राइविंग लाइसेंस पूरे देश में मान्य होता है, जबकि यहां अमरीका में लाइसेंस हर राज्य के द्वारा जारी किया जाता है। इसलिए अगर आप एक से दूसरे राज्य में रहने जाते हैं, तो आपको पुराना लाइसेंस जमा करवाकर नए राज्य में दूसरा लाइसेंस लेना पड़ेगा। इसलिए हर राज्य में लाइसेंस के नियम और प्रक्रिया में भी अंतर हो सकता है। मैं कैलिफोर्निया में रहता हूं, इसलिए मुझे यहीं की प्रक्रिया के बारे में थोड़ी-बहुत जानकारी है।

कैलिफोर्निया में अगर आप केवल कुछ समय के लिए आए हैं, तो आप अपने देश के लाइसेंस पर ही गाड़ी चला सकते हैं। आप यहां का लाइसेंस नहीं ले सकते। लेकिन अगर आप यहां लंबे समय तक रहने वाले हैं, तो आपको यहीं का लाइसेंस लेना होगा। उसके बिना आप वाहन नहीं चला सकते। कार के लाइसेंस पर आप केवल कार चला सकते हैं। बाइक चलाने के लिए अलग तरह का लाइसेंस होता है। ट्रक या अन्य तरह के भारी वाहन चलाने के लाइसेंस की प्रक्रिया और भी अलग है। ट्रैक्टर या अन्य कृषि उपकरण अगर आप केवल अपने निजी उपयोग ले लिए चलाएंगे और हाइवे पर नहीं ले जाएंगे, तो शायद उनके लिए लाइसेंस की ज़रूरत नहीं होती है।

जिसे हम भारत में आरटीओ कहते हैं, वह यहां डीएमवी अर्थात डिपार्टमेंट ऑफ मोटर व्हीकल्स कहलाता है, सरल शब्दों में वाहन विभाग। डीएमवी से लाइसेंस पाने की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है। लाइसेंस पाने के लिए अपने ही शहर के डीएमवी कार्यालय में जाना आवश्यक नहीं है, आप राज्य के किसी भी डीएमवी कार्यालय में जा सकते हैं। डीएमवी की वेबसाइट पर अपॉइंटमेंट लिया जा सकता है या बिना अपॉइंटमेंट भी ये काम किया जा सकता है। अंतर केवल इतना होता है कि अपॉइंटमेंट के बिना जाने पर आपको कतार में ज्यादा समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। सैन होज़े जैसे एक-दो शहरों में विशेष डीएमवी कार्यालय भी हैं, जहां अपॉइंटमेंट के बिना ही काम होता है, अपॉइंटमेंट नहीं लिया जा सकता।

मैं फ्रीमोंट शहर में रहता हूं, इसलिए सबसे पहले मैंने फ्रीमोंट में ही अपॉइंटमेंट पाने का प्रयास किया। लेकिन कई हफ्तों आगे तक कोई अपॉइंटमेंट उपलब्ध नहीं था। इसलिए मैंने आसपास के शहरों के लिए प्रयास किया और मुझे रेडवुड सिटी के डीएमवी में कुछ दिनों बाद का अपॉइंटमेंट मिला। उसके अनुसार मैं सही समय पर सभी दस्तावेज़ लेकर डीएमवी के कार्यालय पहुंचा। वहां एक फॉर्म भरना पड़ता है, जिसमें अपने बारे में सामान्य जानकारी, जैसे नाम, पता, फोन नंबर, जन्मतिथि, सोशल सेक्युरिटी नंबर, बालों का रंग, आंखों का रंग, कद, वजन आदि आदि पूछा जाता है।

इसके बाद एक काउंटर पर इस फॉर्म की और मेरे दस्तावेज़ों की जांच हुई। इसमें मुझे अपना पासपोर्ट, वीज़ा, आई-९४ फॉर्म की कॉपी, घर के पते को प्रमाणित करने के लिए बिजली और इंटरनेट सेवा के बिल की कॉपी आदि दस्तावेज़ दिखाने पड़े।

इसके बाद एक टोकन मिला। अब मैं प्रतीक्षालय में बैठ गया। लगभग १५ मिनट बाद मेरा नंबर आया। संबंधित काउंटर पर जाकर मैंने अपना फॉर्म दिया और लाइसेंस के लिए ३३ डॉलर का शुल्क चुकाया। फिर आंखों की जांच हुई। यह सामान्य जांच थी, जैसी आमतौर पर होती है। एक बोर्ड पर अलग-अलग आकार में अंग्रेज़ी के कुछ अक्षर लिखे हुए थे और मुझे बारी-बारी से एक-एक आंख बंद रखकर वे अक्षर पढ़ने थे। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद मशीन द्वारा मेरे अंगूठे का निशान लिया गया, जैसा भारत में भी आधार कार्ड बनवाते समय लिया जाता है।

फिर मुझे मेरे शुल्क की रसीद मिली। अब मैं आगे तीसरे काउंटर पर पहुंचा, जहां मेरा फोटो खींचा गया और एक पर्ची मिली। वहीं एक कक्ष में लगभग १० काउंटर बने हुए थे और हर काउंटर पर एक-एक कंप्यूटर लगा हुआ था। वहां लिखित परीक्षा होती है। आजकल यह कंप्यूटर द्वारा होती है। इसमें सड़क सुरक्षा और यातायात के नियमों से संबंधित वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाते हैं। हर प्रश्न के ४ विकल्पों में से एक सही विकल्प चुनना होता है।

डीएमवी द्वारा हर साल एक बुकलेट प्रकाशित की जाती है, जिसमें लाइसेंस से संबंधित सारी प्रक्रिया की जानकारी, सड़क के सारे नियम, सभी तरह के चिह्नों और संकेतों की जानकारी आदि दी होती है। यह पुस्तिका डीएमवी के कार्यालय में मुफ्त मिलती है या पीडीएफ के रूप में भी डाउनलोड की जा सकती है। अब तो स्मार्टफोन के लिए डीएमवी का ऐप भी है, जिसमें यह पुस्तक भी उपलब्ध रहती है।

लिखित परीक्षा के सारे प्रश्न इसी बुकलेट से पूछे जाते हैं। इसमें उतीर्ण होने के लिए ३ अवसर मिलते हैं। अगर आप तीन बार प्रयास करने पर भी असफल रहे, तो आवेदन प्रक्रिया निरस्त हो जाएगी और आपको फिर फॉर्म भरकर, दोबारा आवेदन करके, पुनः शुल्क देकर पूरी प्रक्रिया दोहरानी पड़ेगी।

मैंने डीएमवी की बुकलेट पूरी गंभीरता से कई बार पढ़ी थी, इसलिए अधिकतर प्रश्नों के उत्तर मुझे मालूम थे। सौभाग्य से मैं पहले ही प्रयास में उत्तीर्ण हो गया।

अब मुझे अगले काउंटर से कुछ दस्तावेज़ दिए गए। इसमें मेरा लर्नर्स परमिट था, अर्थात भारत की भाषा में लर्निंग लाइसेंस। यह एक वर्ष के लिए मान्य होता है। एक वर्ष के भीतर मुझे अधिकतम ३ प्रयासों में ड्राइविंग टेस्ट पास करना होगा, अन्यथा आवेदन रद्द हो जाएगा और फिर प्रक्रिया शुरू करनी पड़ेगी। अब मुझे कैलिफोर्निया की सड़कों पर कार चलाने की अनुमति मिल गई थी, लेकिन इसमें शर्त ये है कि कोई ऐसा व्यक्ति भी मेरे साथ बैठा होना चाहिए, जिसके पास कैलिफोर्निया का लाइसेंस हो। मतलब मैं अकेला गाड़ी नहीं चला सकता।

अब प्रक्रिया का पहला चरण पूरा हो गया था। अगला चरण वास्तविक परीक्षा का था, जिसमें मुझे डीएमवी के परीक्षक को वाहन चलाकर दिखाना होगा, ताकि उन्हें तसल्ली हो कि मैं सुरक्षित तरीके से कार चला सकता हूं। उसके बाद ही मुझे लाइसेंस जारी किया जाएगा।

डीएमवी अपॉइंटमेंट के पिछले अनुभव से मुझे पता चल गया था कि यहां अपॉइंटमेंट जल्दी नहीं मिलते, अक्सर ३-४ हफ़्तों बाद की ही तारीख मिल पाती है। इसलिए मैंने सबसे पहले डीएमवी की वेबसाइट से ड्राइविंग टेस्ट के लिए अपॉइंटमेंट ले लिया। इस बार भी फ्रीमोंट में लगभग २ महीने बाद तक कोई तारीख उपलब्ध नहीं थी और सबसे जल्दी रेडवुड सिटी में ही अपॉइंटमेंट उपलब्ध था। इसलिए फिर एक बार मैंने रेडवुड सिटी को ही चुन लिया और मुझे शुक्रवार २७ अक्टूबर को दोपहर सवा २ बजे का अपॉइंटमेंट मिला।

अब मुझे कार चलाने की प्रैक्टिस करनी थी। इसमें यहां के मेरे एक मित्र ने भी बहुत मदद की। वे रविवार को समय निकालकर मुझे अपने साथ ले गए और उनकी कार चलवाकर प्रैक्टिस करवाई। इससे मुझे यहां गाड़ी चलाने के कई नियमों के बारे में उपयोगी जानकारी मिल गई।

लेकिन मैं इतने भर से संतुष्ट और आश्वस्त नहीं था। मुझे अपनी ड्राइविंग में बहुत सुधार की ज़रूरत महसूस हो रही थी। इसलिए मैंने सोचा कि मुझे किसी ड्राइविंग स्कूल से संपर्क करना चाहिए। इंटरनेट से मैंने जानकारी ढूंढी, कुछ नाम छांटे, उन स्कूलों के बारे में लोगों की टिप्पणियां और अनुभव पढ़े और फिर एक स्कूल को फाइनल किया।

अब मुझे अगले शनिवार और रविवार की छुट्टी में ड्राइविंग की प्रैक्टिस करनी थी। मैंने उस ड्राइविंग स्कूल में कॉल करके बात तय की और शनिवार को एक इंस्ट्रक्टर कार लेकर मेरे घर आए। फिर शनिवार शाम और रविवार को सुबह मैंने २-२ घंटे के दो सेशन लिए। इन सत्रों के दौरान उन्होंने मुझे अमरीका में सड़कों पर वाहन चलाने के बारे में कई नियम और उपयोगी सुझाव बताए। साथ ही, मेरी ड्राइविंग की कुछ कमियां भी बताईं और उनमें सुधार करने के तरीके भी समझाए। इन सब बातों से मुझे काफी मदद मिली।

ड्राइविंग टेस्ट के लिए भी हमे गाड़ी का इंतज़ाम करना होता है। वह भी मैंने इसी ड्राइविंग स्कूल से कर लिया था। २७ तारीख को नियत समय पर एक अन्य इंस्ट्रक्टर कार लेकर मेरे घर आए और फिर हम लोग दोबारा रेडवुड सिटी डीएमवी ऑफिस पहुंचे।

अब एक अलग काउंटर पर जाकर मैंने मेरा लर्नर्स परमिट दिखाया। इसके अलावा इंश्योरेंस भी दिखाना होता है, ताकि अगर टेस्ट के दौरान कोई हादसा हो जाए, तो उस खर्च की भरपाई हो सके। चूंकि मैंने ड्राइविंग स्कूल से ही गाड़ी भी किराए पर ली थी, इसलिए इंश्योरेंस का इंतज़ाम उन्होंने ही किया था। इस काउंटर पर भी मेरे अंगूठे का निशान स्कैन करके मेरी पहचान की पुष्टि की गई और हमें टेस्ट के लिए जाने का निर्देश मिला।

डीएमवी ऑफिस के परिसर में ही एक तरफ टेस्ट के लिए वाहनों की कतार होती है। हम भी अपनी गाड़ी लेकर कतार में पहुंचे। वहां प्रक्रिया बहुत सुस्त चल रही थी। लगभग ४५-५० मिनट हम उसी कतार में प्रतीक्षा करते रहे। बाहर गर्मी बहुत थी और हालांकि कार में तो एसी चल रहा था, लेकिन फिर भी टेस्ट की चिंता के कारण मैं थोड़ा नर्वस था। मुझे अपनी हथेलियों पर पसीना महसूस हो रहा था!

लेकिन एक तरह से ये इंतज़ार अच्छा भी था। इस दौरान मैं अन्य परीक्षार्थियों और परीक्षकों को देखते हुए बहुत-कुछ ऑब्जर्व कर पाया और मुझे रिलैक्स होने के लिए भी काफी समय मिल गया था। इसलिए जब मेरा नंबर आया, तब तक मैं लगभग सामान्य हो चुका था।

अब इस परीक्षा में भी दो चरण होते हैं। सबसे पहले परीक्षक ने यह जांचा कि गाड़ी के ब्रेक, हॉर्न, इंडिकेटर आदि ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं और मुझे उनका उपयोग करने का तरीका मालूम है या नहीं। अगर इनमें कोई कमी हो, तो परीक्षा निलंबित हो जाती है और परीक्षार्थी को वापस भेज दिया जाता है। बाद में दोबारा अपॉइंटमेंट लेकर फिर से आना पड़ेगा। लेकिन हमारी गाड़ी में सब ठीक था और मैंने भी सारे जवाब सही दे दिए थे।

मेरी परीक्षक एक अनुभवी महिला थी। सारी जांच के बाद वह गाड़ी में बैठी और मुझे कार चलाने का निर्देश दिया। अब अगले १०-१५ मिनट तक शहर की सड़कों पर मुझसे वाहन चलवाकर उसने मेरी परीक्षा ली। इस दौरान कई बार मुझे दाएं मुड़ने, बाएं मुड़ने, लेन बदलने, रुकने, गाड़ी रिवर्स करने आदि आदि के बारे में वह निर्देश देती रही और मेरे प्रदर्शन को जांचती रही।

परीक्षक के पास एक स्कोरकार्ड होता है, जिसमें सारी गलतियां नोट की जाती हैं। कुछ गलतियों को गंभीर माना जाता है, जैसे स्पीड लिमिट का पालन न करना, सिग्नल तोड़ना, कहीं टकरा जाना आदि। इनमें से एक भी गलती करने का अर्थ है टेस्ट में फेल होना। इसके अलावा अन्य सामान्य गलतियों पर भी ध्यान दिया जाता है, लेकिन अधिकतम १५ छोटी गलतियों तक की अनुमति होती है।

लगभग १५ मिनट बाद हम वापस डीएमवी ऑफिस पहुंच गए। मैंने गाड़ी वापस पार्किंग में खड़ी की।परीक्षिका ने मुझे मेरा स्कोरकार्ड दिया और बताया कि मैं टेस्ट में पास हो गया हूं। मैंने छोटी ६ गलतियां की थीं, लेकिन कुल मिलाकर मेरी ड्राइविंग ठीक थी। मैंने उससे पूछा कि क्या ड्राइविंग के दौरान मुझसे कोई ऐसी बड़ी गलती हुई है, जिसका मुझे विशेष ध्यान रखना चाहिए? उसने मुस्कुराकर जवाब दिया कि अगर वैसी कोई गलती हुई होती, तो आप पास नहीं हुए होते।

अब मैं फिर ऑफिस में गया और करेक्शन काउंटर पर पहुंचा। वहां मेरा पुराना परमिट वापस ले लिया गया और बदले में मुझे एक नया कागज़ मिला। यह मेरा अस्थायी ड्राइविंग लाइसेंस है। यह इस बात का प्रमाण है कि मैंने परीक्षा पास कर ली है और अब मुझे यहां कार चलाने की अनुमति मिल गई है। अब अगले २-३ हफ़्तों में मेरा ड्राइविंग लाइसेंस का कार्ड डाक द्वारा मेरे घर के पते पर आएगा, तब तक मैं इस अस्थायी दस्तावेज़ का उपयोग लाइसेंस के रूप में कर सकता हूं।

इस तरह बहुत-सी चुनौतियों और कठिनाइयों से गुजरने के बाद अंततः लाइसेंस मिल गया है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कई बार मैं परेशान हुआ, चिंतित हुआ, निराश हुआ, आशंकित हुआ, दुःखी भी हुआ, लेकिन अंत भला तो सब भला। मुझे खुशी है कि मैं पहली बार में ही पास हो गया हूं, लेकिन उससे ज्यादा खुशी इस बात की है कि मैंने सारे नियमों को ठीक से समझकर यह प्रक्रिया पूरी की है।

इस दौरान मुझे कई बार याद आ रहा था कि भारत में लाइसेंस बनवाना कितना सरल है, लेकिन कितना गलत भी है। यही भारत में सड़क दुर्घटनाओं का एक मुख्य कारण भी है। भारत में लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया इससे भी ज़्यादा कठिन होनी चाहिए और उसका ईमानदारी से पालन भी होना चाहिए। बहुत संभावना है कि भारत में अगर मैं इस टेस्ट में फेल भी हो जाता तो परीक्षक को कुछ पैसे देकर रिजल्ट बदलवा सकता था या शायद मुझे जानबूझकर फेल बताया जाता और फिर पैसे लेकर पास कर दिया जाता। ये चीज़ें बंद होनी चाहिए और वो हम लोग ही कर सकते हैं क्योंकि पास होने के लिए हम रिश्वत देने को तैयार रहते हैं।

खैर, अब मुझे कार खरीदने की प्रक्रिया शुरू करनी है। वह भी यहां भारत की तुलना में बहुत अलग और बहुत जटिल रहने वाली है। उसके बारे में भी आपको जल्दी ही बताऊंगा। लेकिन पहले आप इस लेख के बारे में अपने विचार मुझे बताइये। आभार!

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