अमरीकी दस्तावेज़ (अमरीकी डायरी – ७)

अमरीकी डायरी के पिछले दो भागों में आपने पढ़ा कि मैं जुलाई में परिवार के साथ सिंगापुर से अमरीका के कैलिफोर्निया आया। पहला हफ्ता पालो आल्टो के एक होटल में गुज़ारने के बाद हम एक महीने के लिए सनीवेल के एक अपार्टमेंट में रहे। उसके बाद हमने फ्रीमोंट शहर में अपना स्थायी ठिकाना ढूंढ लिया और अगस्त २०१७ में हम यहां शिफ्ट हो गए। इस लेख में मैं आपको उसी शुरुआती एक महीने के कुछ अनुभवों के बारे में बताने वाला हूं।

जुलाई २०१७ से पहले भी मैं पिछले एक वर्ष में ४ बार अमरीका आ चुका था। लेकिन तब मैं केवल २-३ हफ़्तों के लिए आता था, होटल में ठहरता था, शनिवार-रविवार की छुट्टी में सैन फ्रांसिस्को या आसपास कहीं घूमने निकल जाता था अथवा होटल में ही आराम करता था। इस तरह दो-तीन हफ्ते बिताकर मैं वापस भारत या सिंगापुर लौट जाता था।

लेकिन इस बार बात अलग थी। अब मुझे लंबे समय तक यहां रहना है और काम करना है। इसलिए कई कानूनी आवश्यकताओं को भी पूरा करना था। जैसे अब मुझे वेतन अमरीका में ही मिलेगा, इसलिए यहां मेरा एक बैंक में खाता होना चाहिए। यहां टैक्स भी देना पड़ेगा, इसलिए उससे संबंधित नियमों को समझना होगा। यहां सार्वजनिक परिवहन की सुविधा न के बराबर है, क्षेत्रफल बहुत अधिक और जनसंख्या कम होने के कारण घर-दुकानें, बाज़ार, कार्यालय सब बहुत दूर-दूर हैं, इसलिए छोटे-छोटे कामों के लिए भी कहीं जाना हो, तो कार होनी चाहिए। उसके लिए ड्राइविंग लाइसेंस की आवश्यकता पड़ेगी। ड्राइविंग लाइसेंस पाने के लिए सोशल सेक्युरिटी नंबर (एसएसएन) लेना पड़ेगा। अब एक-एक करके ये सारे दस्तावेज तैयार करने थे।

शुरुआत बैंक खाते से करना तय किया। पास के एक बैंक से संपर्क करके मैंने खाता खुलवाने के बारे में पूछताछ की। वहां से जवाब मिला कि खाता खुलवाने के लिए एसएसएन आवश्यक है। अब एसएसएन मिलने में तो कुछ दिनों का समय लगता। क्या तब तक बैंक खाते के बिना ही रहूं? उसमें देर हो गई, तो क्या करूंगा? बैंक खाता न होने के कारण समय पर वेतन नहीं मिला तो क्या करूंगा? घर-गृहस्थी का खर्चा कैसे चलेगा? या अगर बैंक खाता न होने के कारण वेतन चेक से मिल गया, तो फिर किसी बैंक में जाकर चेक भुनाने के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ेगा। क्या कोई और विकल्प नहीं हो सकता?

मैं ये सारे काम यथाशीघ्र निपटाना चाहता था। मैंने इंटरनेट पर खोजबीन शुरू की। पता चला कि एक-दो बैंक हैं जहां एसएसएन के बिना भी खाता खुल सकता है। इंटरनेट पर जानकरी ढूंढते समय ही क्रेडिट यूनियनों के बारे में भी पता चला। ये मेरे लिए नई जानकारी थी, इसलिए मैंने इस बारे में और जानने का विचार किया।

क्रेडिट यूनियन को मोटे तौर पर आप भारत की सहकारी समितियों या स्व-सहायता समूहों जैसा मान सकते हैं। लोग आपस में मिलकर एक समूह बनाते हैं, समूह के हर सदस्य का एक खाता होता है, जिसमें वह राशि जमा करता है और आवश्यकतानुसार सदस्यों को कर्ज भी दिया जाता है। लेकिन कर्ज के लिए ब्याज की दर बैंकों की तुलना में कम होती है क्योंकि बैंकों का उद्देश्य लाभ कमाना है, जबकि ऐसे समूहों का उद्देश्य अपने सदस्यों को आर्थिक सहयोग प्रदान करना। भारत में स्व-सहायता समूह बैंकों की तुलना में बहुत छोटे स्तर पर कार्य करते हैं, लेकिन अमरीका में क्रेडिट यूनियन लगभग बैंकों जैसे ही हैं। यहां तक कि कई क्रेडिट यूनियनों का तो विश्व की कई बैंकों व मास्टरकार्ड और वीज़ा जैसी कंपनियों के साथ गठबंधन भी होता है, इसलिए उनके द्वारा जारी किए जाने वाले डेबिट और क्रेडिट कार्ड का उपयोग भी विश्व-भर में कहीं भी किया जा सकता है। लेकिन शुरू में जब मेरे पास यह सारी जानकारी नहीं थी, तब मैं क्रेडिट यूनियन के बारे में सुनकर पहले-पहल थोड़ा आशंकित था। मुझे लगा कहीं ये भारी ब्याज पर कर्ज देने वाले साहूकारों या महाजनों जैसी कोई व्यवस्था तो नहीं है? लेकिन एक-दो सहकर्मियों से जानकारी मिली कि ये भी वास्तव भी लगभग बैंकों जैसे ही हैं।

इसलिए मैंने बैंकों से पहले एक क्रेडिट यूनियन से संपर्क करना तय किया। उनकी वेबसाइट से जानकारी देखकर मैंने उन्हें ईमेल भेजा। कुछ ही मिनट में उनके प्रतिनिधि का जवाब आ गया। उन्होंने मुझे बताया कि एसएसएन की आवश्यकता नहीं है और केवल अपने पासपोर्ट की कॉपी और नौकरी के नियुक्ति-पत्र की कॉपी भेजकर मैं खाता खुलवा सकता हूं। साथ ही, मुझे क्रेडिट कार्ड भी मिल जाएगा।

खाता खुलवाने के लिए आवश्यक फॉर्म भी उन्होंने मुझे भेज दिया था। मैंने वह फॉर्म ऑनलाइन भरा और उसके साथ-साथ अन्य आवश्यक दस्तावेज़ों की कॉपी भी ईमेल द्वारा भेज दी। कुछ ही मिनटों में ईमेल पर ही मुझे खाता खुल जाने का कन्फर्मेशन मिल गया और साथ ही मेरे खाते की जानकारी व इंटरनेट बैंकिंग संबंधी जानकारी भी प्राप्त हो गई। इस तरह एक काम पूरा हुआ।

अमरीका में क्रेडिट कार्ड होना बहुत ज़रूरी है। क्रेडिट कार्ड से खर्च करने और समय पर उसका बिल चुकाने से आपकी क्रेडिट हिस्ट्री बनती है। मोटे तौर पर यह इस बात का रिकॉर्ड होता है कि आप पैसों के लेनदेन के मामले में और कर्ज का भुगतान करने के मामले में कितने गंभीर और विश्वसनीय हैं, आप समय पर कर्ज चुकाते हैं या उसमें देरी करते हैं। इन सबके आधार पर आपका क्रेडिट स्कोर बनता है, और उसी से तय होता है कि आपको किसी ज़रूरत के लिए कर्ज मिलेगा या नहीं, मिलेगा तो कितना मिलेगा और उसकी ब्याज दर कितनी होगी। यहां तक कि क्रेडिट स्कोर के आधार पर आपके बीमा के प्रीमियम की राशि भी कम या ज़्यादा हो सकती है। इसलिए क्रेडिट स्कोर और क्रेडिट हिस्ट्री यहां बहुत महत्वपूर्ण है और उसके लिए क्रेडिट कार्ड एक उपयोगी साधन है।

लेकिन इसी कारण अच्छा क्रेडिट कार्ड मिलना ही यहां ज्यादा मुश्किल हो सकता है। कुछ बैंक तो नए लोगों को क्रेडिट कार्ड देते ही नहीं। कुछ देते भी हैं, तो बहुत सारे प्रतिबंधों और ऊंची ब्याज दर के साथ देते हैं। जिनको क्रेडिट कार्ड नहीं मिल पाता, उनके लिए एक विकल्प प्रीपेड क्रेडिट कार्ड का होता है, जिसमें आप एक कार्ड लेते हैं और कुछ सौ डॉलर का टॉप-अप करवाते हैं, और फिर उस कार्ड के द्वारा आप उतनी रकम खर्च कर सकते हैं। यह वैसा ही है, जैसे भारत में हम अपने फोन में रिचार्ज करवाते हैं और फिर उतना बैलेंस खर्च होने तक कॉल कर सकते हैं।

मुझे क्रेडिट कार्ड को लेकर भी चिंता थी। लेकिन अगले ही दिन वह भी दूर हो गई क्योंकि स्टैनफर्ड क्रेडिट यूनियन से ही मुझे क्रेडिट कार्ड के लिए भी स्वीकृति मिल गई। अगले कुछ दिनों में डाक द्वारा मेरा डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और कुछ चेकबुक्स भी आ गईं। कुछ हफ्तों तक इस क्रेडिट कार्ड का उपयोग करके तसल्ली कर लेने के बाद पिछले महीने अक्टूबर में मैंने सिंगापुर का अपना पुराना क्रेडिट कार्ड और बैंक खाता बंद करवा दिया, जिसके बारे में आप मेरे एक अन्य पोस्ट में पढ़ ही चुके हैं।

यहां अमरीकी बैंकिंग प्रणाली के बारे में भी बहुत संक्षेप में थोड़ी जानकारी दे देता हूं। भारत में बैंक खातों के लिए हम सामान्यतः बचत खाता या सेविंग अकाउंट, करेंट अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट या एफडी आदि नामों का उपयोग करते हैं। लेकिन यहां मुझे जितना समझ आया है, उसके अनुसार अपना बचत खाता या सेविंग अकाउंट यहां अमरीका में चेकिंग अकाउंट कहलाता है। सिंगापुर में वह करेंट अकाउंट था। कई अन्य कॉमनवेल्थ देशों में भी इसे करेंट अकाउंट ही कहा जाता है। जिसे हम भारत में बचत खाता या सेविंग्स अकाउंट कहते हैं, उसकी अवधारणा यहां थोड़ी अलग है। यहां सेविंग अकाउंट के उपयोग के साथ कुछ प्रतिबंध होते हैं, जैसे आप उसके लिए चेक जारी नहीं कर सकते और आप महीने में ६ से अधिक बार उस खाते से पैसे नहीं निकाल सकते। जो अपने वहां फिक्स्ड डिपॉजिट है, वह यहां टाइम डिपॉजिट या सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट कहलाता है। इसमें आप एक निश्चित अवधि के लिए रकम जमा करवाते हैं और उतने समय तक निकाल नहीं सकते।

खैर, मेरा चेकिंग अकाउंट और क्रेडिट कार्ड मिलने के बाद अब बैंक का मेरा काम पूरा हो गया था। इसके बाद मैंने सोशल सेक्युरिटी नंबर लेने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली। मैंने सोचा था कि उसके बारे में भी मैं आपको इसी लेख में बताऊंगा, लेकिन यह लेख पहले ही बहुत लंबा हो गया है, इसलिए एसएसएन की जानकारी संक्षेप में निपटाने की बजाय मैं अगले किसी लेख में उसके बारे में विस्तार से लिखूंगा और भारत के आधार कार्ड के साथ उसकी समानता और अंतर के बारे में भी बात करूंगा।

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