अमरीकी अपार्टमेन्ट (अमरीकी डायरी – ९)

२०११, पुणे, भारत। मुझे रहने के लिए किराए का एक फ्लैट चाहिए था। मैंने इंटरनेट पर कुछ विकल्प देखे, उनमें से एक पसंद किया, बात तय हुई, फ्लैट देखा, एग्रीमेंट हुआ, फ्लैट की चाबी मुझे मिल गई और मैं वहां रहने लगा।

२०१६,सिंगापुर। मुझे रहने के लिए किराए का एक फ्लैट चाहिए था। मैंने इंटरनेट पर कुछ विकल्प देखे, उनमें से एक पसंद किया, बात तय हुई, फ्लैट देखा, एग्रीमेंट हुआ, फ्लैट की चाबी मुझे मिल गई और मैं वहां रहने लगा।

दोनों ही बार पूरी प्रक्रिया लगभग समान थी, सिर्फ रुपये के बदले सिंगापुर डॉलर में सौदा हुआ, एग्रीमेंट की कुछ शर्तों में थोड़ा-बहुत बदलाव था, लेकिन मोटे तौर पर प्रक्रिया वही थी।

२०१७, कैलिफोर्निया, अमरीका। सब बदल गया!

अमरीकी डायरी में आइये आज बात करें किराए पर एक फ्लैट लेने के मेरे अनुभव के बारे में। पिछले भागों में आपने पढ़ा कि हम सिंगापुर से अमरीका आने के बाद शुरुआती एक महीने के दौरान सनीवेल शहर में रहे। वह हमारा अस्थायी ठिकाना था। अब मुझे लंबे समय तक रहने के लिए एक फ्लैट देखना था। सनीवेल के अलावा मेरे मन में फॉस्टर सिटी और फ्रीमोंट शहरों में भी फ्लैट देखने का विचार था। मैंने इंटरनेट पर कुछ विकल्प देखे। किराये की दरें, ऑफिस आने-जाने में लगने वाला समय आदि सारी बातों पर विचार करने के बाद मुझे लगा कि फ्रीमोंट ही हमारे लिए सबसे अच्छा विकल्प होगा। इसलिए फ्रीमोंट के दो-तीन फ्लैट छांट लिए।

अब फ्लैट देखने के लिए संपर्क करना था। भारत में जो फ्लैट कहलाता है, वह यहां अपार्टमेंट है। जो अपने वहां कॉलोनी, मोहल्ला कहलाता है वह यहां कम्युनिटी है। एक बात यहां बहुत आम है कि ऐसी ज़्यादातर कम्युनिटीज़ या पूरा अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स किसी रियल एस्टेट कंपनी का होता है। उनके संचालन और रखरखाव के लिए कर्मचारी होते हैं। हमने अपनी लिस्ट में जितने अपार्टमेंट छांटे थे, अब उनके ऑफिसों में कॉल करके मिलने का अपॉइंटमेंट लिया और एक शनिवार सुबह इस अभियान पर निकल पड़े।

हर ऑफिस में कुछ बातें समान थीं। हर जगह मुझे अपनी पहचान की पुष्टि के लिए अपना पासपोर्ट दिखाना पड़ा क्योंकि यह अमरीका में हमारा पहला ही हफ्ता था और उस समय मेरे पास पहचान का एकमात्र दस्तावेज़ पासपोर्ट ही था। हर जगह उनका एक कर्मचारी हमें एक सैंपल फ्लैट दिखाता था, कम्युनिटी कॉम्प्लेक्स में उपलब्ध सभी सुविधाओं के बारे में बताता था, और अंत में एक ब्रोशर भी देता था, जिसमें उस कॉम्प्लेक्स में उपलब्ध हर तरह के अपार्टमेंट्स का विवरण, किराए के बारे में जानकारी और अन्य सुविधाओं का विवरण होता था। कौन-सा अपार्टमेंट किस तारीख से उपलब्ध हो जाएगा, इसकी जानकारी भी दी होती थी।

सारे विकल्प देखने और विचार करने के बाद मैंने आर्डनवुड फॉरेस्ट में एक अपार्टमेंट लेना तय किया। इसके नाम में फॉरेस्ट पढ़कर इसे जंगल मत समझ लीजिएगा, यह शहर में ही है। 

भारत या सिंगापुर की तुलना में यहां की प्रक्रिया बहुत जटिल, लंबी और ऊबाऊ थी। अपार्टमेंट पसंद करने के बाद एक आवेदन भेजना पड़ता है, जिसके बाद वह कंपनी निर्णय लेती है। मैंने भी उनकी वेबसाइट पर जाकर फॉर्म भरा और परिवार के हर व्यस्क सदस्य के लिए प्रति व्यक्ति निर्धारित शुल्क का भुगतान किया। मेरी नौकरी के नियुक्ति पत्र की एक प्रति भी अपलोड की, ताकि इस बात की पुष्टि हो सके कि मैं हर महीने किराया दे पाने लायक कमाता हूं।

अगले दिन उनका ईमेल आया कि मेरा आवेदन स्वीकृत हो गया है। साथ ही एग्रीमेंट की एक ई-कॉपी भी आई, जिसमें मुझे मेरे बारे में और मेरे परिवार के जो भी सदस्य मेरे साथ इस अपार्टमेंट में रहेंगे, उन सबके बारे में बहुत सारी जानकारी भरनी थी। ये काम पूरा होने के बाद मुझे और परिवार के सभी वयस्क सदस्यों को उस पर हस्ताक्षर करने थे। इसके बाद मैंने वह ई-दस्तावेज़ वापस कंपनी को भेज दिया और साथ ही डिपॉजिट की रकम भी जमा करवा दी। अगले दिन कंपनी के प्रतिनिधि ने भी उस पर हस्ताक्षर करके एक कॉपी मुझे भेज दी।

अब एक काम हो गया था, लेकिन कई काम अभी बाकी थे। मैं जिस तारीख से इस अपार्टमेंट में रहने आऊंगा, उस तारीख से बिजली का मीटर मेरे नाम पर होना चाहिए ताकि उस दिन से आगे का ही बिल मुझे चुकाना पड़े और बिल मेरे ही नाम से आए। उसके लिए विद्युत वितरण कंपनी के कॉल सेंटर पर फोन किया। उस कंपनी का नाम पैसिफिक गैस एंड इलेक्ट्रिकल्स है, संक्षेप में इसे पीजी एंड ई कहा जाता है। वहां कॉल करके मेरा पूरा नाम, अपार्टमेंट का पता, कनेक्शन शुरू करने की तारीख, मेरा ईमेल पता, फोन नंबर आदि जानकारी दर्ज करवाई। फिर उन्होंने मुझे एक नंबर दिया। यही अब मेरे पीजी एंड ई खाते का नंबर था। यह सारी जानकारी मुझे उन्होंने ईमेल पर भी भेज दी, जिसका प्रिंट आउट मुझे लगने वाला था।

यहां के नियम के अनुसार मुझे अपार्टमेंट का बीमा भी करवाना था, ताकि कोई क्षति, आपदा आदि की।स्थिति में मुझे और मेरे परिवार को आर्थिक मदद मिले और उसका बोझ रियल एस्टेट कंपनी पर न आए। अब इसके लिए मैंने एक बीमा कंपनी की वेबसाइट पर जाकर पॉलिसी चुनी और उसके प्रीमियम का भुगतान किया। अब उसकी भी रसीद ईमेल द्वारा मेरे पास आ गई, जिसके प्रिंट आउट की मुझे आवश्यकता पड़ने वाली थी।

लेकिन अभी कहानी खत्म नहीं हुई थी। अपार्टमेंट लेते समय मुझे पहले महीने का किराया भी देना था और उसका भुगतान केवल कैशियर्स चेक के माध्यम से ही करना था। यह नई मुसीबत थी, जिसके लिए मुझे अब बैंक जाना था। मेरा बैंक खाता पालो आल्टो शाखा में है। इसलिए एक दिन मैं वहां गया। काउंटर पर बैठी युवती को अपना खाता नंबर बताया, पहचान की पुष्टि के लिए अपना पासपोर्ट दिखाया और कैशियर्स चेक बनवाने के लिए राशि बताई व अन्य विवरण दिया। कुछ देर बाद वह चेक बनवाकर लाई। उसमें लिखा हुआ था कि यह चेक किसके लिए है और कितनी राशि का है। सारा विवरण जांच लेने के बाद मैंने रसीद पर हस्ताक्षर कर दिये और चेक लेकर घर आ गया। मुझे जो समझ आया, उसके अनुसार अपने भारत के डिमांड ड्राफ्ट को ही शायद यहां कैशियर्स चेक कहा जाता है।

अब मेरे पास सभी दस्तावेज़ हो चुके थे। अब अपार्टमेंट की चाबियां लेने के लिए मैंने उनके ऑफिस में फिर संपर्क किया और मिलने का समय तय किया। निर्धारित दिन निर्धारित समय पर मैं सारे दस्तावेज़ और चेक लेकर वहां पहुंचा। उन्होंने मेरी फाइल तैयार कर रखी थी, जिसमें मेरा हस्ताक्षर किया हुआ एग्रीमेंट, मेरे पहचान पत्र की कॉपी और कुछ अन्य दस्तावेज थे। इस फ़ाइल की एक कॉपी उन्होंने मुझे भी दी। कैशियर्स चेक की फोटोकॉपी भी मुझे दी गई।

अब उनका एक कर्मचारी मेरे साथ अपार्टमेंट तक आया। उसके पास एक चेक लिस्ट थी। हमने पूरे अपार्टमेंट का निरीक्षण किया। जहां-जहां कोई खरोंच, दाग आदि दिखे, उन सबका विवरण उस चेक लिस्ट में जोड़ा गया। अपार्टमेंट में उपलब्ध करवाए गए उपकरणों को चलाकर पुष्टि की गई और सारी बातें चेकलिस्ट में नोट की गईं। अब उस कर्मचारी ने और मैंने उस रिपोर्ट की दो प्रतियों पर हस्ताक्षर किए और दोनों ने एक-एक प्रति अपने रिकॉर्ड के लिए रख ली। उसके बाद वह मुझे अपार्टमेंट की चाबियां सौंपकर चला गया।

इस तरह अमरीका में किराए का मेरा पहला मकान लेने की प्रक्रिया पूरी हुई। अब कम से कम अगले एक साल तक यही हमारा ठिकाना होने वाला था। लेकिन अब इस मकान को रहने लायक घर बनाने के लिए बहुत कुछ करना बाकी था। फर्नीचर, टीवी, किचन के बर्तन, खरीदने थे, इंटरनेट कनेक्शन लेना था, और छोटी-छोटी कई चीजें लेनी थीं। यह सब अगले कुछ हफ्तों में पूरा हुआ। उसके बारे में अगले लेख में बताऊंगा। फिलहाल आप मुझे बताइये कि आज का लेख आपको कैसा लगा? कोई नई जानकारी मिली कि नहीं?

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